गहरे समुद्र की रहस्यमयी और अनोखा जीव है - चमकदार ‘इस्क्रा ग्लिटर वर्म’

Jitendra Kumar Sinha
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धरती पर जीवन की विविधता जितनी भूमि पर दिखाई देती है, उससे कहीं अधिक रहस्य समुद्र की अथाह गहराइयों में छिपे हुए हैं। वैज्ञानिक समय-समय पर ऐसे जीवों की खोज करते रहते हैं जो प्रकृति की अद्भुत रचनात्मकता का परिचय देते हैं। वर्ष 2025 में वैज्ञानिकों ने एक ऐसे ही अनोखे जीव की खोज की, जिसे ‘इस्क्रा ग्लिटर वर्म’ (Iskra Glitter Worm) नाम दिया गया। यह छोटा सा समुद्री जीव अपनी चमकदार बनावट और असाधारण जीवनशैली के कारण दुनिया भर के वैज्ञानिकों और प्रकृति प्रेमियों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।


इस्क्रा ग्लिटर वर्म की खोज अमेरिका के कैलिफोर्निया तट के गहरे समुद्री क्षेत्रों में की गई। यह क्षेत्र समुद्र की उन गहराइयों में स्थित है जहां सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंचता और चारों ओर घना अंधकार रहता है। गहरे समुद्र का वातावरण अत्यंत कठिन होता है। यहां तापमान बहुत कम होता है, पानी का दबाव अत्यधिक होता है और भोजन के स्रोत भी सीमित होते हैं। ऐसे प्रतिकूल वातावरण में किसी जीव का जीवित रहना ही अपने आप में आश्चर्य है, लेकिन इस्क्रा ग्लिटर वर्म ने न केवल वहां जीवन विकसित किया है बल्कि अपने अनोखे गुणों के कारण विशेष पहचान भी बनाई है।


इस जीव का नाम उसकी सबसे विशिष्ट विशेषता के कारण रखा गया है। इसके शरीर पर छोटे-छोटे स्केल या शल्क होते हैं जो प्रकाश पड़ने पर चमकने लगते हैं। यह चमक बिल्कुल वैसी दिखाई देती है जैसे किसी वस्तु पर ग्लिटर या चमकीला पाउडर छिड़क दिया गया हो। समुद्र की गहराइयों में रहने वाले अधिकांश जीवों का रंग गहरा या पारदर्शी होता है, लेकिन इस्क्रा ग्लिटर वर्म की चमकदार संरचना इसे अन्य जीवों से अलग बनाती है। यही कारण है कि वैज्ञानिकों ने इसे “ग्लिटर वर्म” नाम दिया।


इस्क्रा ग्लिटर वर्म का जीवन ‘व्हेल फॉल्स’ (Whale Falls) नामक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र से गहराई से जुड़ा हुआ है। जब कोई विशाल व्हेल मर जाती है, तो उसका शरीर समुद्र की गहराइयों में जाकर तल पर बैठ जाता है। वहां उसका शव वर्षों तक अनेक समुद्री जीवों के लिए भोजन और ऊर्जा का स्रोत बना रहता है। इस प्रक्रिया को व्हेल फॉल कहा जाता है। एक मृत व्हेल का शरीर हजारों जीवों को भोजन उपलब्ध करा सकता है। इस्क्रा ग्लिटर वर्म भी इसी पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है। यह व्हेल के अवशेषों के आसपास रहता है और वहां उपलब्ध जैविक पदार्थों से अपना जीवनयापन करता है। इस प्रकार यह समुद्री खाद्य श्रृंखला और पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


इस्क्रा ग्लिटर वर्म की सबसे रोचक विशेषता उसकी जैव-दीप्ति (Bioluminescence) मानी जा रही है। जैव-दीप्ति वह प्रक्रिया है जिसमें जीव अपने शरीर के भीतर होने वाली रासायनिक क्रियाओं के माध्यम से प्रकाश उत्पन्न करते हैं। गहरे समुद्र में अंधकार के कारण प्रकाश बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई समुद्री जीव इसका उपयोग शिकार को आकर्षित करने, साथी खोजने या शिकारियों से बचने के लिए करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस्क्रा ग्लिटर वर्म की चमक भी उसे शिकारियों से सुरक्षा प्रदान करती है। अचानक उत्पन्न होने वाली चमक शिकारी को भ्रमित कर सकती है, जिससे वर्म को बच निकलने का अवसर मिल जाता है।


समुद्र की गहराई में दबाव सतह की तुलना में सैकड़ों गुना अधिक होता है। सामान्य जीव ऐसे वातावरण में जीवित नहीं रह सकते। इसके अलावा वहां का तापमान भी लगभग शून्य के आसपास रहता है। इस्क्रा ग्लिटर वर्म ने इन कठिन परिस्थितियों के अनुरूप अपने शरीर को ढाल लिया है। इसकी कोशिकाएं और ऊतक अत्यधिक दबाव को सहन करने में सक्षम हैं। यही कारण है कि यह उन स्थानों पर भी जीवित रह सकता है जहां मानव द्वारा निर्मित कई मशीनें भी लंबे समय तक काम नहीं कर पाती।


इस जीव की खोज केवल एक नई प्रजाति की पहचान भर नहीं है, बल्कि यह गहरे समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र को समझने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस्क्रा ग्लिटर वर्म जैसे जीव यह समझने में मदद कर सकते हैं कि अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवन कैसे विकसित होता है और कैसे टिके रहता है। इसके अलावा जैव-दीप्ति से जुड़ी इसकी विशेषताएं भविष्य में जैव प्रौद्योगिकी, चिकित्सा विज्ञान और समुद्री अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकती हैं।


इस्क्रा ग्लिटर वर्म प्रकृति की अद्भुत रचनाओं में से एक है। आकार में छोटा होने के बावजूद यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी चमकदार बनावट, जैव-दीप्ति की क्षमता और समुद्र की गहराइयों में जीवित रहने की अद्भुत योग्यता इसे वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का एक आकर्षक विषय बनाती है। यह खोज हमें याद दिलाती है कि पृथ्वी के महासागरों में अभी भी अनगिनत रहस्य छिपे हुए हैं, जिन्हें जानना और समझना मानव ज्ञान की अगली बड़ी चुनौती है।



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