राजभवन की ऐतिहासिक इमारत में खुलेगा 'जीवन संध्या' वृद्धाश्रम

Jitendra Kumar Sinha
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पटना में सामाजिक सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। रोटरी क्लब ऑफ कंकड़बाग की ओर से राजभवन परिसर की पुरानी ऐतिहासिक इमारत में 30 बेड वाला आधुनिक वृद्धाश्रम 'जीवन संध्या' स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए राजभवन ने अपनी पुरानी इमारत को 30 वर्षों की लीज पर उपलब्ध कराया है। यह बिहार और झारखंड में किसी भी रोटरी क्लब द्वारा संचालित किया जाने वाला पहला वृद्धाश्रम होगा। इस पहल का उद्देश्य उन बुजुर्गों को सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मीय वातावरण उपलब्ध कराना है, जो किसी कारणवश परिवार से दूर हैं या जिन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता है।


रोटरी क्लब ऑफ कंकड़बाग द्वारा गुरुवार को रोटरी भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी साझा की गई। क्लब के पदाधिकारियों ने बताया कि वृद्धाश्रम केवल रहने की व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां बुजुर्गों के स्वास्थ्य, मनोरंजन, मानसिक संतुलन और सामाजिक सहभागिता का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। 


आज के समय में बदलती पारिवारिक संरचना, एकल परिवारों की बढ़ती संख्या और व्यस्त जीवनशैली के कारण अनेक बुजुर्ग अकेलेपन का सामना कर रहे हैं। ऐसे में 'जीवन संध्या' जैसे संस्थान उनके जीवन को नई आशा और सम्मान देने का कार्य करेंगे।


प्रस्तावित वृद्धाश्रम में प्रारंभिक चरण में 30 बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था होगी। यहां स्वच्छ एवं सुरक्षित आवास, पौष्टिक भोजन, नियमित स्वास्थ्य जांच, चिकित्सा सुविधा, योग एवं ध्यान, पुस्तकालय, मनोरंजन और सामाजिक गतिविधियों जैसी अनेक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। रोटरी क्लब का प्रयास रहेगा कि यहां रहने वाले बुजुर्ग स्वयं को परिवार जैसा वातावरण महसूस करें। उनके शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक आवश्यकताओं का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।


राजभवन की पुरानी इमारत लंबे समय तक प्रशासनिक उपयोग में रही है। अब इस भवन का उपयोग समाज सेवा के लिए किया जाना एक सराहनीय कदम माना जा रहा है। ऐतिहासिक धरोहर को सामाजिक कल्याण के केंद्र में बदलने से भवन का संरक्षण भी होगा और समाज को एक महत्वपूर्ण सेवा भी प्राप्त होगी। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सरकारी संस्थानों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से जनहित के बड़े कार्य सफलतापूर्वक किए जा सकते हैं।


संवाददाता सम्मेलन के दौरान रोटरी क्लब ऑफ कंकड़बाग की नई कार्यकारिणी की भी घोषणा की गई। नई टीम एक जुलाई से अपना कार्यभार संभालेगी। नई कार्यकारिणी में अध्यक्ष- रोटेरियन डॉ. दीप्ति सहाय, सचिव- नितेश मिश्रा, कोषाध्यक्ष- आशीष कुमार। नई टीम ने समाज सेवा की विभिन्न परियोजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया। 'जीवन संध्या' वृद्धाश्रम उनकी प्राथमिक योजनाओं में शामिल रहेगा।


भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के कारण लोगों की औसत आयु बढ़ी है, लेकिन कई बुजुर्ग सामाजिक और पारिवारिक उपेक्षा का भी सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में गुणवत्तापूर्ण वृद्धाश्रमों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।


विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक वृद्धाश्रम केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि सक्रिय, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जीने का माध्यम बन सकते हैं। यदि इन संस्थानों में स्वास्थ्य, सुरक्षा और भावनात्मक सहयोग की समुचित व्यवस्था हो, तो बुजुर्ग अपने जीवन के अंतिम चरण को गरिमा के साथ व्यतीत कर सकते हैं।


रोटरी क्लब ऑफ कंकड़बाग की यह पहल केवल एक भवन निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील सोच का परिचायक है। यह संदेश भी देती है कि बुजुर्ग केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की अमूल्य धरोहर हैं। यदि इस मॉडल को सफलता मिलती है, तो भविष्य में बिहार और झारखंड के अन्य शहरों में भी इसी प्रकार के वृद्धाश्रम स्थापित किए जा सकते हैं। इससे अनेक जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित और सम्मानपूर्ण जीवन का अवसर मिलेगा।


राजभवन की पुरानी इमारत में स्थापित होने वाला 'जीवन संध्या' वृद्धाश्रम सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण है। रोटरी क्लब ऑफ कंकड़बाग की यह पहल न केवल बेसहारा और जरूरतमंद बुजुर्गों के जीवन में नई उम्मीद जगाएगी, बल्कि समाज को यह भी प्रेरित करेगी कि वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान और उनकी देखभाल हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना बिहार में समाज सेवा का एक आदर्श मॉडल बन सकती है।

                 


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