महिलाओं के नाम संपत्ति रजिस्ट्री पर बढ़ी छूट

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके नाम पर संपत्ति के स्वामित्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य में जमीन और अन्य अचल संपत्तियों की रजिस्ट्री कराने पर महिलाओं को मिलने वाली छूट में वृद्धि की गई है। सरकार के इस फैसले के तहत अब महिलाओं के नाम पर संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर कुल 0.5 प्रतिशत की छूट मिलेगी। यह निर्णय महिलाओं को संपत्ति के अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।


राज्य सरकार द्वारा जारी नई व्यवस्था के अनुसार यदि किसी भूमि या संपत्ति का निबंधन विक्रय पत्र (सेल डीड) अथवा दान पत्र (गिफ्ट डीड) के माध्यम से किसी महिला के नाम पर किया जाता है, तो स्टाम्प शुल्क में मिलने वाली छूट को बढ़ा दिया गया है। पहले महिलाओं को स्टाम्प शुल्क में 0.3 प्रतिशत की छूट मिलती थी, जिसे अब बढ़ाकर 0.4 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा निबंधन शुल्क में पहले से मिलने वाली 0.3 प्रतिशत की छूट यथावत जारी रहेगी। हालांकि दोनों प्रकार की छूटों की गणना के बाद प्रभावी लाभ लगभग 0.5 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। इससे महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदना पहले की तुलना में अधिक लाभकारी होगा।


हाल ही में राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री तथा रजिस्ट्री की दरों में वृद्धि की गई है। ऐसे समय में जब संपत्ति खरीदने की लागत बढ़ रही है, महिलाओं को अतिरिक्त छूट देने का फैसला खरीदारों के लिए राहत लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे परिवारों को महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। कई बार लोग कर और शुल्क बचाने के लिए विभिन्न विकल्प तलाशते हैं। ऐसे में सरकार द्वारा दी जा रही यह वैधानिक छूट लोगों को महिलाओं के नाम पर संपत्ति दर्ज कराने के लिए आकर्षित कर सकती है। इससे महिलाओं के नाम पर संपत्तियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।


संपत्ति का स्वामित्व किसी भी व्यक्ति की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को मजबूत बनाता है। भारतीय समाज में लंबे समय तक महिलाओं के नाम पर संपत्ति का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा है। कई परिवारों में संपत्ति पुरुषों के नाम पर ही दर्ज होती रही है। सरकार का यह कदम महिलाओं को संपत्ति का अधिकार दिलाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा। जब किसी महिला के नाम पर भूमि या मकान होता है, तो उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है और भविष्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटने में भी उसे सहारा मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं के नाम पर संपत्ति होने से घरेलू स्तर पर निर्णय लेने में उनकी भागीदारी भी बढ़ती है। इससे लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलता है और महिलाओं का आत्मविश्वास मजबूत होता है।


इस नई व्यवस्था का प्रभाव केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखने को मिलेगा। गांवों में अक्सर भूमि ही सबसे बड़ी संपत्ति होती है। यदि परिवार अपनी जमीन महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री कराते हैं, तो उन्हें सरकारी छूट का लाभ मिलेगा। शहरी क्षेत्रों में मकान, फ्लैट और व्यावसायिक संपत्तियों की खरीद-बिक्री में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ सकती है। इससे रियल एस्टेट क्षेत्र में महिला निवेशकों की संख्या बढ़ने की संभावना है।


महिलाओं को संपत्ति खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना केवल राजस्व संबंधी निर्णय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन का भी माध्यम है। कई राज्यों में महिलाओं के लिए स्टाम्प शुल्क में रियायत देने की नीति पहले से लागू है और उसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बिहार सरकार का यह कदम भी इसी दिशा में एक प्रयास है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और वे संपत्ति की वास्तविक मालिक बन सकें। इससे भविष्य में महिलाओं की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।


महिलाओं के नाम पर जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री पर कुल 0.5 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय पहल है। बढ़ती संपत्ति कीमतों के बीच यह राहत न केवल आर्थिक लाभ प्रदान करेगी, बल्कि समाज में महिलाओं की भागीदारी और अधिकारों को भी मजबूत बनाएगी। यदि अधिक से अधिक परिवार इस अवसर का लाभ उठाते हैं, तो आने वाले वर्षों में महिलाओं के नाम पर संपत्ति स्वामित्व का प्रतिशत बढ़ेगा और आर्थिक समानता की दिशा में एक नया अध्याय लिखा जाएगा।



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