संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यूएई की कैबिनेट ने 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ यूएई ऐसा करने वाला पहला अरब देश बन गया है। नए नियम के तहत 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना व्यक्तिगत खाता नहीं बना सकेंगे और न ही इन प्लेटफॉर्मों की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर पाएंगे।
डिजिटल युग में सोशल मीडिया बच्चों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। हालांकि इसके अनेक लाभ हैं, लेकिन इसके दुष्प्रभाव भी लगातार सामने आ रहे हैं। यूएई में किए गए अध्ययनों के अनुसार बच्चे प्रतिदिन औसतन लगभग तीन घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं। यह समय पढ़ाई, खेलकूद, पारिवारिक संवाद और शारीरिक गतिविधियों को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग से बच्चों में मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद, आत्मविश्वास की कमी और नींद संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा साइबर बुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी और अनुचित सामग्री तक पहुंच भी गंभीर चिंताओं में शामिल हैं।
यूएई सरकार द्वारा स्वीकृत नियमों के अनुसार, 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत अकाउंट बनाने की अनुमति नहीं होगी। वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कई प्रमुख फीचर्स का उपयोग नहीं कर सकेंगे। प्लेटफॉर्म कंपनियों को आयु सत्यापन की प्रभावी व्यवस्था करनी होगी। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित कंपनियों और खाताधारकों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का उद्देश्य बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर करना नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल दुनिया के संभावित खतरों से सुरक्षित रखना है।
यूएई का यह कदम ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई देश बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका सहित अनेक देशों में सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कड़े नियम बनाने पर चर्चा चल रही है। कई देशों ने बच्चों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा कानूनों को मजबूत किया है और अभिभावकों को अधिक नियंत्रण देने की दिशा में कदम उठाए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी लंबे समय से बच्चों के अत्यधिक स्क्रीन टाइम को लेकर चेतावनी देती रही हैं। उनका कहना है कि कम उम्र में सोशल मीडिया की लत बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित कर सकती है।
किसी भी कानून की सफलता केवल सरकारी प्रयासों पर निर्भर नहीं करती। बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी रखना और उन्हें डिजिटल दुनिया के प्रति जागरूक बनाना अभिभावकों की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। माता-पिता को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए, उनके स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना चाहिए और उन्हें इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के बारे में शिक्षित करना चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों को खेलकूद, पुस्तक-पठन, कला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रोत्साहित किया जाए ताकि उनका समग्र विकास हो सके।
यूएई का यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि बच्चों के स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। डिजिटल तकनीक आज जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसके उपयोग में संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। यदि यह नीति सफल होती है तो संभव है कि अन्य अरब देशों और दुनिया के कई हिस्सों में भी इसी तरह के नियम लागू किए जाएं। बच्चों की मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यूएई ने जो पहल की है, वह डिजिटल युग में जिम्मेदार शासन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है।
सोशल मीडिया आधुनिक जीवन का एक शक्तिशाली माध्यम है, लेकिन बच्चों के लिए इसका अनियंत्रित उपयोग कई जोखिम पैदा कर सकता है। यूएई द्वारा 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लगाने का निर्णय इस चुनौती से निपटने का एक साहसिक प्रयास है। यह कदम बच्चों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण प्रदान करने और उनके स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
