बिना मुंह और पेट वाला समुद्र की रहस्यमयी जीव है - “जॉम्बी वर्म”

Jitendra Kumar Sinha
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समुद्र की अथाह गहराइयों में ऐसे अनेक जीव रहते हैं, जिनके बारे में जानकर आश्चर्य होता है। इनमें से एक बेहद अनोखा जीव है जॉम्बी वर्म (Zombie Worm)। यह जीव न केवल अपने विचित्र स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसके जीवन जीने का तरीका भी वैज्ञानिकों को हैरान कर देता है। इस जीव के पास न तो मुंह होता है और न ही पेट, फिर भी यह वर्षों तक जीवित रहकर अपना भोजन प्राप्त करता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे ओसेडैक्स (Osedax) कहा जाता है, जिसका अर्थ है “हड्डियां खाने वाला”। इसकी खोज वर्ष 2002 में हुई थी और तब से यह समुद्री जीव विज्ञान के अध्ययन का एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है।


जॉम्बी वर्म समुद्र की अत्यंत गहरी सतहों पर पाया जाता है, जहां सूर्य का प्रकाश तक नहीं पहुंचता। समुद्र के इस अंधकारमय संसार में जीवन बेहद कठिन होता है। यहां भोजन के स्रोत बहुत सीमित होते हैं। ऐसे वातावरण में जॉम्बी वर्म ने जीवित रहने का एक अनोखा तरीका विकसित किया है। जब कोई विशाल व्हेल या अन्य बड़ा समुद्री जीव मर जाता है, तो उसका शरीर धीरे-धीरे समुद्र की गहराइयों में जाकर बैठ जाता है। समय के साथ उसका मांस गल जाता है और केवल हड्डियां बचती हैं। यही हड्डियां जॉम्बी वर्म के लिए भोजन का मुख्य स्रोत बन जाती हैं।


सामान्यतः सभी जीव भोजन को मुंह के माध्यम से ग्रहण करते हैं और पेट में उसका पाचन होता है। लेकिन जॉम्बी वर्म के पास इनमें से कोई भी अंग नहीं होता। यह जीव अपनी जड़ों जैसी संरचनाओं को हड्डियों के भीतर प्रवेश कराता है। इन जड़ों में विशेष प्रकार के बैक्टीरिया रहते हैं। ये बैक्टीरिया हड्डियों में मौजूद वसा और पोषक तत्वों को तोड़ते हैं और उन्हें ऐसे रूप में बदल देते हैं, जिसे जॉम्बी वर्म आसानी से अवशोषित कर सके। इस प्रकार बैक्टीरिया और जॉम्बी वर्म के बीच एक सहजीवी संबंध बन जाता है, जिससे दोनों को लाभ मिलता है।


समुद्री वैज्ञानिकों के अनुसार, एक मृत व्हेल का कंकाल वर्षों तक समुद्र की गहराइयों में पड़ा रह सकता है। इस दौरान हजारों जॉम्बी वर्म उसकी हड्डियों पर बस जाते हैं और धीरे-धीरे उन्हें खा जाते हैं। विशेष रूप से व्हेल की हड्डियों में वसा की मात्रा अधिक होती है, जो जॉम्बी वर्म के लिए ऊर्जा का उत्कृष्ट स्रोत है। यही कारण है कि इन्हें अक्सर व्हेल के अवशेषों के आसपास बड़ी संख्या में देखा जाता है।


जॉम्बी वर्म की एक और रोचक विशेषता इसका प्रजनन तंत्र है। मादा जॉम्बी वर्म आकार में अपेक्षाकृत बड़ी होती है, जबकि नर बेहद छोटे होते हैं। कई बार एक मादा के शरीर के भीतर या आसपास दर्जनों नर पाए जाते हैं। यह व्यवस्था समुद्र की गहराइयों में प्रजनन को आसान बनाती है, जहां साथी ढूंढना बहुत कठिन होता है। वैज्ञानिक इसे समुद्री जीवों में पाए जाने वाले सबसे विचित्र प्रजनन तरीकों में से एक मानते हैं।


वर्ष 2002 में वैज्ञानिकों ने पहली बार इस जीव की पहचान की। समुद्र की गहराइयों में शोध के दौरान उन्हें व्हेल की हड्डियों पर उगे हुए लाल रंग के छोटे-छोटे जीव दिखाई दिए। आगे के अध्ययन में पता चला कि ये जीव हड्डियों को खाकर जीवित रहते हैं। इस खोज ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की कि समुद्र की गहराइयों में मृत जीवों के अवशेषों का पुनर्चक्रण किस प्रकार होता है। जॉम्बी वर्म समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में सफाईकर्मी की भूमिका निभाता है और हड्डियों को विघटित कर पोषक तत्वों को पुनः पर्यावरण में लौटाने में सहायता करता है।


जॉम्बी वर्म केवल एक विचित्र जीव ही नहीं है, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। यदि समुद्र की गहराइयों में मृत व्हेलों और अन्य जीवों की हड्डियां लंबे समय तक जमा होती रहें, तो पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। जॉम्बी वर्म इन हड्डियों को धीरे-धीरे नष्ट करके पोषक तत्वों को अन्य जीवों के लिए उपलब्ध कराता है। इस प्रकार यह समुद्र के प्राकृतिक चक्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।


जॉम्बी वर्म प्रकृति की अद्भुत रचनाओं में से एक है। बिना मुंह और पेट के जीवित रहना, हड्डियों को भोजन बनाना और समुद्र की गहराइयों में कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताना इसे एक अनोखा जीव बनाता है। वर्ष 2002 में हुई इसकी खोज ने वैज्ञानिकों को समुद्री जीवन के ऐसे रहस्यों से परिचित कराया, जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की गई थी। जॉम्बी वर्म हमें यह सिखाता है कि प्रकृति में जीवन अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए कितने अद्भुत और अनोखे तरीके विकसित कर सकता है।



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