बिहार सरकार राज्य में चीनी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। नई औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के तहत चीनी मिल लगाने वाले निवेशकों को 40 एकड़ तक सरकारी जमीन 30 साल की लीज पर केवल ₹1 के सांकेतिक शुल्क पर उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करना और नई मिलों की स्थापना के जरिए गन्ना आधारित उद्योगों में निवेश आकर्षित करना है।
राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से बिहार में चीनी उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए बेहतर बाजार मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही एथेनॉल, को-जनरेशन और अन्य गन्ना आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
नीति के तहत निवेशकों को सिर्फ सस्ती जमीन ही नहीं, बल्कि परियोजना की जरूरत के अनुसार अन्य औद्योगिक प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे। सरकार चाहती है कि निजी कंपनियां बिहार में आधुनिक चीनी मिलें स्थापित करें और पुरानी मिलों का पुनर्जीवन करें। इससे गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और राज्य को चीनी उत्पादन के प्रमुख केंद्रों में शामिल करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
बिहार में कभी देश का प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्र माना जाता था, लेकिन समय के साथ कई मिलें बंद हो गईं। अब सरकार इस नई नीति के जरिए उस गौरव को वापस लाने की कोशिश कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निवेशकों की अच्छी भागीदारी मिलती है, तो आने वाले वर्षों में बिहार का चीनी उद्योग एक बार फिर तेजी से विकास कर सकता है।
