अमेरिका ने भारत समेत 17 देशों से आयात होने वाले सामान पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला अमेरिकी व्यापार कानून के सेक्शन 301 के तहत की गई जांच के बाद लिया गया है। अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। नई टैरिफ दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के अनुसार, यह कार्रवाई वैश्विक सप्लाई चेन से जबरन मजदूरी को खत्म करने और मानवाधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से की गई है। अमेरिका का मानना है कि व्यापारिक साझेदार देशों को भी ऐसे उत्पादों के आयात पर सख्त प्रतिबंध लागू करने चाहिए।
शुरुआत में आशंका जताई जा रही थी कि भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है, लेकिन भारत द्वारा जून में अपनी विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) में संशोधन कर जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने के बाद अमेरिका ने भारत को 10% वाले निम्न टैरिफ स्लैब में रखा। इस फैसले के साथ भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, ब्रिटेन, कनाडा और कुछ अन्य देशों पर समान 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जबकि 43 अन्य देशों पर 12.5% तक का टैरिफ लगाया गया है।
हालांकि, यह अतिरिक्त शुल्क सभी उत्पादों पर लागू नहीं होगा। स्टील और एल्युमिनियम जैसे उत्पाद, जिन पर पहले से अलग सेक्टोरल टैरिफ लागू हैं, इस नए फैसले से बाहर रहेंगे। इसके अलावा कुछ ऊर्जा उत्पाद, उर्वरक और विशेष व्यापार समझौतों के तहत आने वाले सामान को भी छूट दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 12.5% की जगह 10% टैरिफ लगना भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे यह संदेश जाता है कि अमेरिका ने भारत द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदमों को स्वीकार किया है। हालांकि, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता अभी जारी है और आने वाले समय में दोनों देश व्यापक व्यापार समझौते (BTA) के तहत इन शुल्कों में और राहत पर बातचीत कर सकते हैं।
अमेरिका का यह फैसला ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने के प्रयास जारी हैं। अब उद्योग जगत और निर्यातकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी द्विपक्षीय व्यापार समझौते में भारत को इन अतिरिक्त शुल्कों से कितनी राहत मिलती है और इसका भारतीय निर्यात पर क्या प्रभाव पड़ता है।
