बिहार सरकार ने दोपहिया और तीनपहिया वाहनों पर लगने वाले मोटर वाहन कर (रोड टैक्स) में वृद्धि का निर्णय लागू कर दिया है। राज्य मंत्रिमंडल से स्वीकृति मिलने के बाद परिवहन विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है और नए कर की दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो नया दोपहिया या तीनपहिया वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं। हालांकि कर में वृद्धि केवल एक प्रतिशत की गई है, लेकिन इससे वाहन खरीदने की कुल लागत में बढ़ोतरी होगी।
परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब दोपहिया वाहनों पर 15 वर्षों के लिए एकमुश्त रोड टैक्स, एक लाख रुपये तक की कीमत वाले दोपहिया वाहन पर अब 9 प्रतिशत टैक्स देना होगा और एक लाख रुपये से अधिक कीमत वाले दोपहिया वाहन पर 10 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा। इससे पहले इन दोनों श्रेणियों में कर की दर एक प्रतिशत कम थी। सरकार ने कर में यह वृद्धि राज्य के राजस्व को मजबूत करने और परिवहन संबंधी विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने के उद्देश्य से की है।
सरकार ने केवल दोपहिया वाहनों तक ही यह बदलाव सीमित नहीं रखा है, बल्कि तीनपहिया वाहनों पर भी टैक्स बढ़ाया गया है। ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा और अन्य श्रेणी के तीनपहिया वाहनों की खरीद पर भी अब पहले की तुलना में अधिक कर देना होगा। हालांकि विभिन्न श्रेणियों के तीनपहिया वाहनों के लिए कर की दरें उनकी कीमत और उपयोग के आधार पर अलग-अलग निर्धारित की गई हैं। इसका प्रभाव विशेष रूप से उन लोगों पर पड़ेगा जो व्यावसायिक उपयोग के लिए नए तीनपहिया वाहन खरीदते हैं।
नई कर व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन खरीदने वाले ग्राहकों को वाहन की एक्स-शोरूम कीमत के साथ अधिक रोड टैक्स का भुगतान करना होगा। उदाहरण के लिए यदि किसी दोपहिया वाहन की कीमत 90,000 रुपये है, तो पहले की तुलना में अब लगभग 900 रुपये अधिक टैक्स देना पड़ सकता है। इसी प्रकार महंगे स्पोर्ट्स बाइक या प्रीमियम स्कूटर खरीदने वालों को भी अतिरिक्त कर देना होगा। यद्यपि यह बढ़ोतरी बहुत अधिक नहीं है, लेकिन बीमा, पंजीकरण शुल्क और अन्य खर्चों के साथ मिलाकर वाहन खरीदने की कुल लागत में वृद्धि अवश्य होगी।
राज्य सरकार के लिए मोटर वाहन कर राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। हर वर्ष बड़ी संख्या में नए दोपहिया और तीनपहिया वाहनों का पंजीकरण होता है। ऐसे में कर की दर में एक प्रतिशत की वृद्धि से सरकार को करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। इस अतिरिक्त आय का उपयोग सड़क निर्माण, सड़क सुरक्षा, परिवहन सेवाओं के विस्तार, यातायात प्रबंधन और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास में किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कर में मामूली वृद्धि से वाहन बिक्री पर बहुत बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। दोपहिया वाहन आज भी आम लोगों की सबसे सुलभ परिवहन व्यवस्था बने हुए हैं। हालांकि कुछ ग्राहक वाहन खरीदने का निर्णय कुछ समय के लिए टाल सकते हैं या कम कीमत वाले मॉडल का चयन कर सकते हैं। वाहन डीलरों का मानना है कि यदि भविष्य में अन्य शुल्कों में भी बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर बिक्री पर दिखाई दे सकता है। फिलहाल एक प्रतिशत कर वृद्धि को उद्योग सामान्य बदलाव के रूप में देख रहा है।
जो लोग नया वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अब वाहन की कुल ऑन-रोड कीमत की जानकारी पहले से प्राप्त कर लेनी चाहिए। केवल एक्स-शोरूम कीमत देखकर निर्णय लेने के बजाय रोड टैक्स, बीमा, पंजीकरण शुल्क और अन्य अनिवार्य खर्चों को भी ध्यान में रखना आवश्यक होगा। व्यावसायिक उपयोग के लिए तीनपहिया वाहन खरीदने वाले लोगों को अपनी लागत और संभावित आय का संतुलित आकलन करना चाहिए, ताकि भविष्य में आर्थिक दबाव का सामना न करना पड़े।
बिहार सरकार द्वारा दोपहिया और तीनपहिया वाहनों पर टैक्स में की गई एक प्रतिशत की वृद्धि राजस्व बढ़ाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इससे सरकार को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, जबकि वाहन खरीदारों को थोड़ी अधिक राशि खर्च करनी पड़ेगी। यद्यपि यह बढ़ोतरी सीमित है, फिर भी इसका प्रभाव प्रत्येक नए वाहन खरीदार पर पड़ेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग परिवहन अवसंरचना, सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में किस प्रकार किया जाता है। यदि सरकार इन संसाधनों का प्रभावी उपयोग करती है, तो यह निर्णय आम नागरिकों के लिए भी दीर्घकाल में लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
