बिहार के नगर निकायों में जीआईएस आधारित प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्टर से बढ़ेगी पारदर्शिता और राजस्व

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार सरकार ने राज्य के सभी नगर निकायों में संपत्ति कर व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने जीआईएस (Geographic Information System) आधारित प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्टर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए निजी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। एजेंसी के चयन के बाद राज्य के सभी 264 नगर निकायों में व्यापक सर्वेक्षण कराया जाएगा, जिसमें प्रत्येक मकान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य प्रकार की संपत्तियों का डिजिटल मानचित्रण किया जाएगा। यह पहल न केवल संपत्ति कर प्रणाली को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाएगी, बल्कि नगर निकायों की आय बढ़ाने तथा नागरिक सेवाओं में सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


जीआईएस यानी भौगोलिक सूचना प्रणाली ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से किसी क्षेत्र की भौगोलिक जानकारी को डिजिटल नक्शे पर प्रदर्शित और विश्लेषित किया जाता है। इस प्रणाली के जरिए प्रत्येक भवन और संपत्ति का सटीक स्थान, आकार, उपयोग, स्वामित्व और अन्य आवश्यक विवरण डिजिटल रूप से दर्ज किया जाता है। जीआईएस आधारित प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्टर बनने के बाद नगर निकायों के पास प्रत्येक संपत्ति का अद्यतन डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। इससे संपत्ति कर निर्धारण अधिक वैज्ञानिक और निष्पक्ष होगा।


सरकार द्वारा चयनित एजेंसी राज्य के सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में घर-घर जाकर सर्वे करेगी। इस दौरान जानकारियां एकत्र की जाएंगी- प्रत्येक संपत्ति का डिजिटल मानचित्रण। भवन का प्रकार और उपयोग (आवासीय, व्यावसायिक या मिश्रित)। भवन का क्षेत्रफल एवं निर्माण संबंधी विवरण। संपत्ति स्वामी से संबंधित आवश्यक जानकारी। वर्तमान कर भुगतान की स्थिति। नई और बिना पंजीकृत संपत्तियों की पहचान। सर्वे के बाद प्राप्त आंकड़ों का नगर निकायों के मौजूदा अभिलेखों से मिलान किया जाएगा ताकि रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों को दूर किया जा सके।


वर्तमान समय में कई नगर निकायों में संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड अधूरे या पुराने हैं। इसके कारण अनेक संपत्तियां कर के दायरे से बाहर रह जाती हैं, जबकि कुछ मामलों में गलत आकलन के कारण विवाद भी उत्पन्न होते हैं। जीआईएस आधारित व्यवस्था लागू होने से प्रत्येक संपत्ति का वास्तविक विवरण उपलब्ध होगा। कर निर्धारण में मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी। कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। नागरिकों के साथ समान और न्यायसंगत व्यवहार सुनिश्चित होगा। विवादों के समाधान में आसानी होगी।


संपत्ति कर नगर निकायों की आय का प्रमुख स्रोत होता है। यदि सभी संपत्तियां सही तरीके से कर दायरे में आ जाएं तो नगर निकायों के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। अतिरिक्त राजस्व का उपयोग सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, पार्क, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन तथा अन्य शहरी सुविधाओं के विकास में किया जा सकेगा। इससे नागरिकों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी और शहरों का समग्र विकास तेज होगा।


जीआईएस आधारित डिजिटल रिकॉर्ड केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में यह शहरी नियोजन, अवैध निर्माण की पहचान, भूमि उपयोग प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, आधारभूत ढांचे के विकास तथा स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के संचालन में भी उपयोगी सिद्ध होगा। डिजिटल डेटा उपलब्ध होने से किसी भी संपत्ति का रिकॉर्ड कुछ ही क्षणों में देखा जा सकेगा। इससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और कागजी अभिलेखों पर निर्भरता कम होगी।


नई व्यवस्था से आम नागरिकों को भी कई सुविधाएं मिलेगी। संपत्ति संबंधी जानकारी अधिक व्यवस्थित होगी और कर निर्धारण की प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी। भविष्य में ऑनलाइन कर भुगतान, संपत्ति विवरण में संशोधन तथा अन्य सेवाएं भी अधिक सरल और प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसके अलावा, सही रिकॉर्ड होने से संपत्ति खरीद-बिक्री, बैंक ऋण और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में भी सुविधा मिलेगी।


बिहार सरकार की जीआईएस आधारित प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्टर तैयार करने की पहल शहरी प्रशासन में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है। सभी 264 नगर निकायों में होने वाला व्यापक सर्वे न केवल संपत्ति कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाएगा, बल्कि नगर निकायों की वित्तीय स्थिति को भी मजबूत करेगा। 


बेहतर राजस्व, सटीक डिजिटल रिकॉर्ड और आधुनिक तकनीक के उपयोग से राज्य के शहरों में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। यदि इस परियोजना को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह बिहार के शहरी शासन मॉडल को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।



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