सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने 26 दिनों से जारी अपना अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दिया। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने अपना अनशन तोड़ा। यह फैसला केंद्र सरकार के साथ लंबी बातचीत और कुछ महत्वपूर्ण आश्वासनों के बाद लिया गया।
पीएम मोदी की पहली प्रतिक्रिया
सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उनके लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा कि सोनम वांगचुक डॉक्टरों की सलाह का पालन करें, अपनी दिनचर्या नियमित रखें और जल्द से जल्द अपना पुराना वजन वापस प्राप्त करें।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि सोनम वांगचुक शीघ्र स्वस्थ हों और स्वस्थ जीवन बिताएं।
क्यों खत्म किया अनशन?
सोनम वांगचुक ने बताया कि पिछले दो दिनों से सरकार के साथ कई दौर की बातचीत चल रही थी। साथ ही देश में संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि जल्द ही एक विस्तृत वीडियो जारी कर बताएंगे कि किन शर्तों और आश्वासनों के आधार पर उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया।
सरकार ने क्या आश्वासन दिया?
केंद्रीय मंत्रियों की ओर से वांगचुक को कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए गए, जिनमें प्रमुख हैं—
शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।
परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए संसद में चर्चा कराई जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
NEET पेपर लीक से प्रभावित परिवारों से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक विचार किया जाएगा।
आंदोलन अभी जारी रहेगा
हालांकि सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगें पूरी होने तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। उनकी प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करना शामिल है।
