भारत और भूटान के बीच दशकों पुरानी मित्रता एक बार फिर नए आयाम पर पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में विकास सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से 4,000 करोड़ रुपये की रियायती ऋण (लाइन ऑफ क्रेडिट) सुविधा पर समझौता किया गया है। इसके साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने तथा भारत की सहायता से भूटान में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। यह समझौता न केवल दोनों देशों के पारंपरिक विश्वास को और मजबूत करेगा, बल्कि हिमालयी क्षेत्र में आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक सहयोग को भी नई दिशा देगा।
भारत लंबे समय से भूटान का सबसे भरोसेमंद विकास साझेदार रहा है। सड़क, पुल, जलविद्युत, शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल सेवाओं और आधारभूत ढांचे के निर्माण जैसे अनेक क्षेत्रों में भारत ने भूटान को निरंतर सहयोग दिया है। नई 4,000 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा भी इसी सहयोग की कड़ी है, जिसका उद्देश्य भूटान की विकास योजनाओं को गति देना और उसकी आर्थिक प्रगति को मजबूत बनाना है। रियायती ऋण होने के कारण भूटान को कम ब्याज दर और आसान शर्तों पर वित्तीय सहायता मिलेगी। इससे देश की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।
लाइन ऑफ क्रेडिट (एलओसी) ऐसी वित्तीय व्यवस्था होती है, जिसके तहत एक देश दूसरे देश को रियायती शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराता है। इस ऋण का उपयोग पूर्व निर्धारित विकास परियोजनाओं में किया जाता है। भारत ने पिछले कई वर्षों में एशिया, अफ्रीका और पड़ोसी देशों को इसी व्यवस्था के माध्यम से विकास सहयोग प्रदान किया है। भूटान को मिलने वाली यह नई ऋण सहायता भी उसकी आर्थिक क्षमता को बढ़ाने और आवश्यक बुनियादी ढांचे के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बैठक के दौरान दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमति व्यक्त की। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विकास, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, चिकित्सा प्रशिक्षण, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने जिस प्रकार भूटान को दवाइयों, टीकों और चिकित्सा सामग्री की सहायता उपलब्ध कराई थी, उसने दोनों देशों के बीच विश्वास को और मजबूत किया। अब यह सहयोग स्वास्थ्य सेवाओं के दीर्घकालिक विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा।
उच्चस्तरीय बैठक में भारत की सहायता से भूटान में संचालित विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति का भी आकलन किया गया। दोनों देशों ने इस बात पर बल दिया कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। बेहतर संपर्क व्यवस्था, ऊर्जा परियोजनाएं, शिक्षा संस्थानों का विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार भूटान की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। भारत इन सभी क्षेत्रों में तकनीकी और वित्तीय सहयोग प्रदान करता रहा है।
भारत और भूटान के संबंध केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरा रणनीतिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी है। हिमालयी क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सतत विकास सुनिश्चित करने में दोनों देशों की साझेदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। भूटान की आर्थिक मजबूती और विकास से पूरे क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। यही कारण है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ "पड़ोसी प्रथम" नीति के तहत विकास आधारित सहयोग को लगातार प्राथमिकता देता रहा है।
4,000 करोड़ रुपये की नई ऋण सुविधा इस बात का प्रमाण है कि भारत और भूटान के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, सम्मान और साझा विकास के सिद्धांतों पर आधारित हैं। दोनों देश एक-दूसरे की आवश्यकताओं और विकास प्राथमिकताओं को समझते हुए मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। यह समझौता भविष्य में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर भी पैदा करेगा। इससे दोनों देशों के नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलेगी।
भारत द्वारा भूटान को 4,000 करोड़ रुपये की रियायती ऋण सहायता प्रदान करने का निर्णय दोनों देशों की ऐतिहासिक मित्रता को और मजबूत बनाने वाला कदम है। विकास परियोजनाओं को गति देने, स्वास्थ्य सहयोग बढ़ाने और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में यह समझौता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और भूटान की यह साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों को ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में स्थिरता, समृद्धि और साझा विकास की दिशा में भी एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करती है।

