देशभर में सड़कों पर आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या और उनसे होने वाले सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि इस समस्या से निपटने के लिए मौजूदा कानूनों का प्रभावी और सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने कहा कि सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे पर घूमने वाले आवारा पशु न केवल लोगों की जान के लिए खतरा हैं, बल्कि स्वयं पशुओं के जीवन को भी जोखिम में डालते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि सड़कों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। कई मामलों में वाहन चालक गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या उनकी मृत्यु तक हो जाती है। वहीं, तेज गति से चलने वाले वाहनों की चपेट में आने से अनेक पशुओं की भी जान चली जाती है। अदालत ने कहा कि यह स्थिति मानव सुरक्षा और पशु कल्याण, दोनों दृष्टियों से चिंताजनक है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समस्या के समाधान के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। आवश्यक है कि राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय और संबंधित एजेंसियां मिलकर इन कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन करें। अदालत ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने, आवारा पशुओं के उचित प्रबंधन, उनके पुनर्वास तथा सड़कों पर उनकी आवाजाही रोकने के लिए समन्वित व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के खुले में छोड़े जाने, पर्याप्त गौशालाओं की कमी, कचरा प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था और निगरानी के अभाव के कारण यह समस्या लगातार बढ़ रही है। कई पशु भोजन की तलाश में सड़क पर पहुंच जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस चुनौती से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन, नगर निकाय, पशुपालन विभाग और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। इसके साथ ही पशु मालिकों की जवाबदेही तय करना, आवारा पशुओं के लिए पर्याप्त आश्रय स्थल विकसित करना, सड़कों की नियमित निगरानी और जनजागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी सड़क सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश है। यदि केंद्र और राज्य सरकारें अदालत के निर्देशों के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई करती हैं, तो सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के साथ-साथ पशुओं के जीवन की रक्षा भी संभव हो सकेगी। इससे सुरक्षित यातायात व्यवस्था और मानवीय पशु संरक्षण, दोनों उद्देश्यों को एक साथ पूरा किया जा सकेगा।

