पंचायत परिसीमन में प्रखंड बनेगा प्रशासनिक केंद्र - गांव से शुरू होगी पूरी प्रक्रिया

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार में पंचायतीराज संस्थाओं के आगामी परिसीमन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज होने लगी हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने परिसीमन की प्रक्रिया का प्रारूप तैयार किया है। इसके तहत अलग-अलग पंचायतीराज संस्थाओं के परिसीमन के लिए प्रशासनिक इकाइयां निर्धारित की गई हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राम पंचायत और पंचायत समिति के परिसीमन के लिए प्रखंड को प्रशासनिक इकाई बनाया जाएगा, जबकि जिला परिषद के लिए जिला प्रशासनिक इकाई होगी। वार्ड पार्षद और पंच के परिसीमन का आधार ग्राम पंचायत होगी।


प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार ग्राम पंचायतों के परिसीमन में प्रखंड महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एक प्रखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों की सीमाओं को व्यवस्थित करने के लिए इसी प्रशासनिक इकाई को आधार बनाया जाएगा। इसी प्रकार पंचायत समिति के परिसीमन में भी प्रखंड को प्रशासनिक इकाई माना जाएगा। वहीं, जिला परिषद के परिसीमन की प्रक्रिया जिला स्तर पर संचालित होगी। जिला प्रशासनिक इकाई के रूप में जिला परिषद के क्षेत्र निर्धारण का काम किया जाएगा। दूसरी ओर, वार्ड पार्षद और पंच के परिसीमन के लिए ग्राम पंचायत को आधार बनाया जाएगा।


परिसीमन की खासियत यह होगी कि इसका प्रस्ताव निचले स्तर से तैयार होगा। ग्राम पंचायतों के परिसीमन का प्रारंभिक प्रस्ताव संबंधित पंचायत के पंचायत सचिव, राजस्व कर्मी और अंचल अमीन मिलकर तैयार करेंगे। इन कर्मचारियों को स्थानीय भौगोलिक और प्रशासनिक स्थिति की जानकारी होने के कारण प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव में यह स्पष्ट किया जाएगा कि संबंधित ग्राम पंचायत की सीमा में कौन-कौन से गांव, टोले या क्षेत्र शामिल होंगे। इसके साथ ही सीमा निर्धारण से जुड़े आवश्यक विवरण भी दर्ज किए जाएंगे। इससे पंचायत की नई सीमा को लेकर स्पष्टता कायम करने में मदद मिलेगी।


परिसीमन की प्रक्रिया को केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रखा जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिक भी अपने पंचायत के संबंधित कर्मियों से परिसीमन के संबंध में अद्यतन जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे लोगों को प्रस्तावित सीमा, शामिल क्षेत्रों और संभावित बदलावों की जानकारी पहले से मिल सकेगी। प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के पास भेजा जाएगा। बीडीओ निर्धारित समय सीमा के भीतर आम लोगों से दावे और आपत्तियां प्राप्त करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि परिसीमन में स्थानीय स्तर की वास्तविक स्थिति और जनता की आपत्तियों को भी शामिल किया जा सके।


दावे और आपत्तियां प्राप्त होने के बाद उनका परीक्षण किया जाएगा। जरूरी सुधार और आवश्यक बदलाव करने के बाद प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद इसे अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) के पास भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक स्तर के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी। इससे सीमा निर्धारण में होने वाली संभावित विसंगतियों को समय रहते दूर करने का अवसर मिलेगा।


प्रशासन, प्रतिनिधित्व और विकास योजनाओं से है। पंचायत की सीमा बदलने से कई बार गांवों का प्रशासनिक जुड़ाव और स्थानीय प्रतिनिधित्व भी प्रभावित होता है। ऐसे में परिसीमन की प्रक्रिया का स्पष्ट, पारदर्शी और जनभागीदारी आधारित होना जरूरी है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा तैयार प्रारूप में निचले स्तर से प्रस्ताव तैयार कराने और आम लोगों से दावे-आपत्ति लेने की व्यवस्था इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। यदि प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी होती है और स्थानीय सुझावों को उचित महत्व मिलता है, तो पंचायतों का परिसीमन अधिक व्यावहारिक और जनहितकारी बनाया जा सकता है।


कुल मिलाकर बिहार में पंचायत परिसीमन की प्रस्तावित व्यवस्था गांव से शुरू होकर प्रखंड और फिर जिला स्तर तक पहुंचेगी। ग्राम पंचायत के लिए पंचायत सचिव, राजस्व कर्मी और अंचल अमीन प्रारंभिक खाका तैयार करेंगे, बीडीओ जनता से दावे-आपत्तियां लेंगे और आगे की प्रक्रिया अनुमंडल स्तर तक पहुंचेगी। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य पंचायतों की सीमाओं को प्रशासनिक जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप व्यवस्थित करना है। आने वाले समय में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ग्रामीण बिहार के कई पंचायत क्षेत्रों का प्रशासनिक नक्शा भी बदल सकता है। ऐसे में ग्रामीण नागरिकों की नजर अब इस प्रक्रिया और प्रस्तावित सीमाओं पर रहेगी।


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