सरकार का फैसला - “सर्दी की दवा का एक फॉर्मूला हुआ प्रतिबंधित”

Jitendra Kumar Sinha
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छोटे बच्चों में सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य दिखने वाली बीमारी के इलाज को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने क्लोरफेनिरामाइन मेलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड के सभी फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) वाली दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी है। इन दवाओं का इस्तेमाल लंबे समय से सर्दी-जुकाम के लक्षणों को कम करने के लिए किया जाता रहा है, लेकिन अब चार साल से कम उम्र के बच्चों के मामले में इनके इस्तेमाल को लेकर सख्ती बरती गई है। सरकार का यह फैसला बच्चों को संभावित दुष्प्रभावों से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दवा नियामक तंत्र से जुड़े तकनीकी सलाहकार समूह ने भी इस तरह के संयोजन पर रोक लगाने की सिफारिश की थी।


सर्दी-जुकाम बच्चों में होने वाली सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। मौसम बदलने, वायरल संक्रमण या अन्य सामान्य कारणों से बच्चों को नाक बहने, छींक आने, नाक बंद होने और खांसी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे में अभिभावक अक्सर तुरंत राहत के लिए दवा का सहारा लेते हैं। यहीं से सावधानी की जरूरत पैदा होती है। बच्चों का शरीर वयस्कों से अलग तरीके से दवाओं पर प्रतिक्रिया करता है। जिस दवा की एक निश्चित मात्रा बड़े व्यक्ति के लिए सुरक्षित हो सकती है, वही छोटे बच्चे के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। इसलिए बच्चों को उम्र और वजन के अनुरूप दवा देना बेहद जरूरी है। सरकार के ताजा फैसले का मूल उद्देश्य भी यही है कि चार साल से कम उम्र के बच्चों को ऐसे फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन से दूर रखा जाए, जिनके इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आई हैं।


सिर्फ निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक ही नहीं लगाई गई है, बल्कि दवा से जुड़ी चेतावनी को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। संबंधित दवाओं पर यह चेतावनी लिखना अनिवार्य किया गया है कि चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इनका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यह चेतावनी अभिभावकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। दवा की पैकिंग पर स्पष्ट सूचना होने से गलत उम्र के बच्चे को दवा दिए जाने की संभावना कम हो सकती है।


सरकार का यह निर्णय अचानक नहीं आया है। दवाओं की सुरक्षा और प्रभावशीलता से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों की राय महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी क्रम में तकनीकी सलाहकार समूह ने क्लोरफेनिरामाइन मेलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड के इस फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन पर रोक की सिफारिश की थी। विशेषज्ञों की ऐसी सिफारिशों का उद्देश्य केवल किसी दवा को बाजार से हटाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होता है कि उपलब्ध उपचार विकल्प मरीजों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित हो।


सरकारी आदेश के बाद अभिभावकों को भी पहले से अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चे को सर्दी-जुकाम होने पर घर में मौजूद किसी पुरानी दवा को अपनी तरफ से देना उचित नहीं है। विशेष रूप से चार साल से कम उम्र के बच्चों के मामले में बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी सर्दी-जुकाम की दवा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। कई बार सामान्य सर्दी-जुकाम कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है। इसलिए हर लक्षण को तुरंत दवा से दबाने के बजाय बच्चे की स्थिति पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सक से सलाह लेना अधिक सुरक्षित तरीका है।


सरकार का यह फैसला एक व्यापक संदेश भी देता है कि बच्चों के इलाज में जल्दबाजी नहीं, सावधानी जरूरी है। सर्दी-जुकाम सामान्य बीमारी जरूर है, लेकिन बच्चों की कम उम्र को देखते हुए दवा का चयन विशेषज्ञ की सलाह से होना चाहिए। दवा की पैकिंग पढ़ना, उम्र संबंधी चेतावनी को समझना और चिकित्सकीय सलाह के बिना दवा न देना अभिभावकों की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार द्वारा संबंधित फॉर्मूले पर लगाया गया प्रतिबंध इसी सावधानी को संस्थागत रूप देने की कोशिश है। छोटे बच्चों के मामले में राहत से पहले सुरक्षा को प्राथमिकता देना ही सबसे बेहतर उपचार नीति है। सरकार का यह कदम भी इसी सोच को मजबूत करता है कि हर दवा हर उम्र के लिए नहीं होती और बच्चों के मामले में एक छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।


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