सावन मास की समाप्ति के बाद बिहार में पर्व-त्योहारों का सिलसिला तेज होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग के तहत संचालित खाद्य सुरक्षा कोषांग ने दूध और दूध से बने उत्पादों की गुणवत्ता की जांच के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। एक सितंबर के बाद शुरू होने वाला यह अभियान राज्य के सभी 38 जिलों में संचालित किया जाएगा।
पर्व-त्योहारों के दौरान दूध, पनीर, खोवा, मिठाई और अन्य दुग्ध उत्पादों की मांग काफी बढ़ जाती है। मांग बढ़ने के साथ ही इन उत्पादों में मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग का विशेष ध्यान दूध और उससे जुड़े उत्पादों की गुणवत्ता पर रहेगा। बाजार में बिकने वाले पनीर, खोवा और अन्य दुग्ध उत्पादों के नमूने लेकर उनकी जांच करायी जाएगी। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की ओर से संदिग्ध प्रतिष्ठानों, दुकानों और खाद्य पदार्थों के निर्माण एवं बिक्री से जुड़े स्थानों पर निरीक्षण किया जाएगा। जरूरत के अनुसार नमूने एकत्र कर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा। जांच में मानकों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रखने का निर्णय लिया है। जिला और प्रखंड स्तर तक खाद्य पदार्थों की जांच की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। इससे छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य पदार्थ बेचने वाले प्रतिष्ठानों की भी निगरानी संभव होगी। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में बाजारों और खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों पर नजर रखने के निर्देश दिए जाएंगे। विशेष रूप से उन स्थानों पर जांच बढ़ायी जाएगी, जहां त्योहारों के दौरान दूध, पनीर, खोवा और मिठाइयों की बिक्री बड़े पैमाने पर होती है।
त्योहारों के समय मिठाइयों और दुग्ध उत्पादों की खपत सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। अधिक मांग को पूरा करने के लिए कुछ कारोबारी घटिया या कृत्रिम सामग्री का इस्तेमाल कर सकते हैं। दूध में पानी या अन्य पदार्थ मिलाने से लेकर खोवा और पनीर की गुणवत्ता में हेराफेरी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में समय रहते जांच अभियान चलाना उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ इस अभियान का उद्देश्य मिलावट करने वाले कारोबारियों में कानून का भय पैदा करना भी है।
खाद्य पदार्थों के नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरने पर संबंधित विक्रेता या कारोबारी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। विभाग की कोशिश होगी कि जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए और मिलावट की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हो। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को भी जागरूक किया जाएगा कि वे खुले या संदिग्ध स्रोतों से दूध एवं दुग्ध उत्पाद खरीदने से बचें। पैकेटबंद खाद्य सामग्री खरीदते समय निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, पैकेजिंग और अन्य जरूरी विवरणों की जांच करें।
पर्व-त्योहार खुशियों और उत्सव का समय होते हैं। ऐसे अवसरों पर परिवार में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल बढ़ जाता है। इसलिए खाद्य पदार्थों की शुद्धता सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी है। स्वास्थ्य विभाग का यह विशेष अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एक सितंबर के बाद सभी 38 जिलों में शुरू होने वाला अभियान यदि नियमित और प्रभावी तरीके से संचालित होता है, तो मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। त्योहारों के मौसम में बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन के साथ-साथ उपभोक्ताओं की भी साझा जिम्मेदारी है। शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ ही स्वस्थ समाज और खुशहाल त्योहार की आधारशिला बन सकते हैं।

