फ्रांस में लाइलाज बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए बड़ा फैसला - इच्छा मृत्यु कानून को मिली अंतिम मंजूरी

Jitendra Kumar Sinha
0

 


फ्रांस में गंभीर और लाइलाज बीमारी से जूझ रहे मरीजों के जीवन के अंतिम चरण को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला हुआ है। फ्रांस की संवैधानिक परिषद ने शुक्रवार को इच्छा मृत्यु से संबंधित कानून को अंतिम मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ फ्रांस उन देशों की सूची में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ गया है, जहां कुछ निर्धारित परिस्थितियों में मरीजों को जीवन के अंत को लेकर कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं। हालांकि संवैधानिक परिषद ने कानून के कुछ प्रावधानों को और स्पष्ट करने की आवश्यकता बताई है। इसके बावजूद परिषद की मंजूरी को फ्रांस में इच्छामृत्यु से जुड़ी कानूनी व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


प्रस्तावित व्यवस्था सामान्य रूप से उन वयस्क नागरिकों या फ्रांस के कानूनी निवासियों पर लागू होगी, जो गंभीर, असाध्य और लाइलाज बीमारी के अंतिम चरण से गुजर रहे हैं। इसका उद्देश्य ऐसे मरीजों को अपने जीवन के अंतिम समय के संबंध में एक कानूनी विकल्प उपलब्ध कराना है। हालांकि यह व्यवस्था हर बीमार व्यक्ति के लिए स्वतः लागू नहीं होगी। इसके लिए निर्धारित चिकित्सकीय और कानूनी शर्तों को पूरा करना आवश्यक होगा। यानि केवल गंभीर बीमारी होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मरीज की स्थिति, बीमारी की प्रकृति और उपचार की संभावनाओं जैसे पहलुओं का भी मूल्यांकन किया जाएगा।


फ्रांस में इच्छा मृत्यु का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक, सामाजिक और नैतिक बहस का विषय रहा है। एक ओर समर्थकों का तर्क रहा है कि असहनीय पीड़ा और लाइलाज बीमारी से गुजर रहे व्यक्ति को अपने जीवन के अंतिम चरण के बारे में निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए। दूसरी ओर विरोध करने वाले समूहों ने जीवन की रक्षा, चिकित्सा नैतिकता और कमजोर मरीजों पर संभावित दबाव को लेकर चिंता जताई है। इस बहस का सबसे संवेदनशील पहलू यही है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन की सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। कानून बनाने वालों के सामने यह चुनौती रही है कि ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए, जिसका दुरुपयोग न हो और मरीज का फैसला वास्तव में उसकी स्वतंत्र इच्छा पर आधारित हो।


फ्रांस का यह कदम उसे उन देशों की श्रेणी के करीब ले जाता है, जहां इच्छामृत्यु या चिकित्सकीय सहायता से मृत्यु से संबंधित कानूनी व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं। नीदरलैंड, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और कनाडा जैसे देशों में अलग-अलग नियमों और शर्तों के तहत जीवन के अंतिम चरण में मरीजों को विशेष कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं। हालांकि सभी देशों की व्यवस्था एक जैसी नहीं है। कहीं चिकित्सक की प्रत्यक्ष भूमिका होती है, तो कहीं मरीज को चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की अलग प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसलिए फ्रांस की व्यवस्था भी अपनी विशिष्ट कानूनी और चिकित्सकीय शर्तों के साथ लागू होगी।


इस कानून के लागू होने की स्थिति में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। मरीज की बीमारी वास्तव में लाइलाज है या नहीं, क्या वह अंतिम चरण में है और क्या उसका निर्णय स्वतंत्र इच्छा से लिया गया है कि इन सभी सवालों की गंभीरता से जांच आवश्यक होगी। चिकित्सकीय क्षेत्र में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि मरीज को उपलब्ध उपचार, दर्द कम करने वाली चिकित्सा और जीवन के अंतिम चरण की देखभाल के सभी विकल्पों की जानकारी दी जाए। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि मरीज किसी क्षणिक निराशा या अपर्याप्त जानकारी के आधार पर फैसला न ले।


इच्छा मृत्यु का प्रश्न केवल कानून या चिकित्सा तक सीमित नहीं है। यह मानव गरिमा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धार्मिक और नैतिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है। समर्थक इसे असहनीय पीड़ा से मुक्ति और व्यक्ति की स्वायत्तता से जोड़ते हैं, जबकि आलोचक मानते हैं कि चिकित्सा व्यवस्था का मूल उद्देश्य जीवन बचाना और मरीज को बेहतर देखभाल उपलब्ध कराना होना चाहिए। फ्रांस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि कानून को लागू करते समय दोनों पक्षों के बीच संतुलन कायम रखा जाए।


कानून को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद अब इसकी व्यावहारिक व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। चिकित्सकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश, मरीजों की सुरक्षा, निर्णय की स्वतंत्रता और संभावित दुरुपयोग रोकने के उपाय बेहद महत्वपूर्ण होंगे। साथ ही, फ्रांस में पेलिएटिव केयर यानी जीवन के अंतिम चरण में मरीजों की पीड़ा कम करने और उन्हें सम्मानजनक देखभाल देने वाली व्यवस्था को भी मजबूत करने की आवश्यकता होगी।


संवैधानिक परिषद की मंजूरी फ्रांस की स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। इससे गंभीर और लाइलाज बीमारी से जूझ रहे मरीजों के अधिकारों को लेकर एक नया कानूनी अध्याय खुल रहा है। फिर भी यह विषय आसान नहीं है। इच्छा मृत्यु से जुड़े हर फैसले के पीछे एक व्यक्ति का जीवन, परिवार की भावनाएं, चिकित्सकीय जिम्मेदारी और समाज के नैतिक मूल्य जुड़े होते हैं। इसलिए कानून की सफलता केवल इसके पारित होने में नहीं, बल्कि इस बात में होगी कि इसे कितनी संवेदनशीलता, पारदर्शिता और सावधानी के साथ लागू किया जाता है। फ्रांस का यह फैसला आने वाले समय में यूरोप और दुनिया के अन्य देशों में भी इच्छा मृत्यु और मरीजों के अधिकारों को लेकर चल रही बहस को नई दिशा दे सकता है।

 

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top