केंद्र सरकार का नियम- एक सरकारी आवास में रहने वाले पति-पत्नी को (दोनों को) नहीं मिलेगा एचआरए का लाभ

Jitendra Kumar Sinha
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केंद्र सरकार ने मकान किराया भत्ता (एचआरए) को लेकर लंबे समय से चल रही भ्रम की स्थिति को स्पष्ट करते हुए महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने कहा है कि यदि पति-पत्नी दोनों केंद्रीय सरकारी कर्मचारी हैं और उनमें से किसी एक को सरकारी आवास आवंटित किया गया है, तो दूसरे कर्मचारी को भी एचआरए (House Rent Allowance) का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान नियमों में बदलाव करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।


केंद्र सरकार के अनुसार, सरकारी आवास एक पारिवारिक सुविधा मानी जाती है। यदि पति या पत्नी में से किसी एक को सरकारी आवास उपलब्ध कराया गया है और दोनों उसी आवास का उपयोग कर रहे हैं, तो दूसरे कर्मचारी को अलग से मकान किराया भत्ता देने का कोई औचित्य नहीं बनता। इसलिए ऐसे मामलों में दूसरे कर्मचारी को एचआरए का भुगतान नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग सुनिश्चित करना और दोहरे लाभ की संभावना को समाप्त करना है।


मकान किराया भत्ता (एचआरए) वह वित्तीय सहायता है जो सरकारी कर्मचारियों को तब दी जाती है, जब उन्हें सरकारी आवास उपलब्ध नहीं होता और वे किराए के मकान में रहते हैं। यह भत्ता कर्मचारी के वेतन, शहर की श्रेणी और तैनाती के स्थान के आधार पर निर्धारित किया जाता है। लेकिन यदि कर्मचारी को सरकारी आवास मिल जाता है, तो सामान्यतः एचआरए का भुगतान बंद कर दिया जाता है। अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यही नियम पति-पत्नी दोनों के सरकारी कर्मचारी होने की स्थिति में भी लागू होगा।


यह प्रावधान केवल उन मामलों में लागू होगा, जहां पति-पत्नी दोनों केंद्रीय सरकारी कर्मचारी हो। दोनों में से किसी एक को सरकारी आवास आवंटित किया गया हो। दोनों उस सरकारी आवास का उपयोग कर रहे हो। ऐसी स्थिति में दूसरे कर्मचारी को एचआरए नहीं मिलेगा, चाहे उसके नाम पर सरकारी आवास आवंटित न हुआ हो।


सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वर्तमान नियमों में संशोधन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इसका अर्थ है कि फिलहाल यही व्यवस्था आगे भी लागू रहेगी। इससे उन कर्मचारियों की उम्मीदों पर विराम लग गया है, जो इस नियम में बदलाव की अपेक्षा कर रहे थे।


सरकार का मानना है कि यदि एक परिवार को पहले ही सरकारी आवास की सुविधा मिल रही है, तो उसी परिवार के दूसरे सदस्य को मकान किराया भत्ता देना सार्वजनिक धन का दोहरा उपयोग होगा। इसलिए मौजूदा नियम वित्तीय अनुशासन और समानता के सिद्धांत पर आधारित हैं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि एचआरए का मूल उद्देश्य उन कर्मचारियों की सहायता करना है, जिन्हें स्वयं किराए के मकान में रहना पड़ता है। जब सरकारी आवास उपलब्ध है, तब एचआरए की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।


इस स्पष्टीकरण के बाद ऐसे केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है, जिनके जीवनसाथी भी सरकारी सेवा में हैं। यदि वे सरकारी आवास में रह रहे हैं, तो केवल आवास की सुविधा मिलेगी, लेकिन दूसरे कर्मचारी को अलग से एचआरए नहीं मिलेगा। हालांकि जिन दंपतियों को सरकारी आवास आवंटित नहीं है और वे किराए के मकान में रहते हैं, उनके मामले में एचआरए से जुड़े अन्य लागू नियम पहले की तरह प्रभावी रहेंगे।


केंद्र सरकार का यह स्पष्टीकरण सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे एचआरए को लेकर लंबे समय से बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई है। सरकार ने साफ कर दिया है कि एक परिवार को सरकारी आवास मिलने पर उसी परिवार के दूसरे केंद्रीय सरकारी कर्मचारी को एचआरए का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही, नियमों में किसी प्रकार के संशोधन की संभावना से भी फिलहाल इनकार कर दिया गया है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों को अपनी आवासीय सुविधाओं और भत्तों की योजना वर्तमान नियमों के अनुरूप ही बनानी होगी।




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