राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 11वीं और 12वीं की राजनीतिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तकें तैयार करने वाली टीम का पुनर्गठन किया है। नई टीम को दोनों कक्षाओं की पुस्तकों में भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक जुड़ाव, समावेशन और समकालीन शैक्षिक विषयों को बेहतर तरीके से शामिल करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब देश की स्कूली शिक्षा में भारतीय संदर्भ और स्थानीय ज्ञान को अधिक महत्व देने पर जोर दिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार एनसीईआरटी की ओर से गठित नई टीम में कुल 20 सदस्य शामिल हैं। इसमें विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और एनसीईआरटी के विषय विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक विज्ञान की पुस्तकों को वर्तमान शैक्षिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है, ताकि विद्यार्थियों को लोकतंत्र, संविधान, शासन व्यवस्था और राजनीति से जुड़े विषयों की जानकारी भारतीय संदर्भ में भी मिल सके। नई पाठ्यपुस्तकों में केवल विषय-वस्तु को अद्यतन करने पर ही ध्यान नहीं दिया जाएगा, बल्कि विद्यार्थियों के बीच भारतीय समाज, संस्कृति और ज्ञान परंपराओं के प्रति समझ विकसित करने का प्रयास भी किया जाएगा।
नई टीम को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा भी शुरू हो गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 20 सदस्यीय टीम में चार सदस्यों का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ाव बताया गया है। इस जानकारी के सामने आने के बाद पाठ्यपुस्तकों के संभावित बदलावों को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। हालांकि, पाठ्यपुस्तकों में किसी भी बदलाव का अंतिम स्वरूप टीम द्वारा तैयार सामग्री और एनसीईआरटी की निर्धारित प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि नई किताबों में किस तरह के विशिष्ट बदलाव किए जाएंगे।
एनसीईआरटी की अधिसूचना के अनुसार, कक्षा 11वीं की राजनीतिक विज्ञान की नई पुस्तक तैयार करने का लक्ष्य नवंबर तक रखा गया है। इसके बाद कक्षा 12वीं की पुस्तक तैयार की जाएगी, जिसके जुलाई 2027 तक तैयार होने की संभावना है। इस समय-सीमा के अनुसार पहले 11वीं की पुस्तक में बदलाव किए जाएंगे और उसके बाद 12वीं की पुस्तक को नए स्वरूप में तैयार किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को नई पाठ्यपुस्तकों के अनुरूप अध्ययन-अध्यापन की तैयारी का पर्याप्त अवसर मिलने की उम्मीद है।
राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकें विद्यार्थियों को संविधान, लोकतंत्र, अधिकार, संस्थाओं और राजनीतिक प्रक्रियाओं की बुनियादी समझ देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में इनमें भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक संदर्भों को शामिल करने का असर विद्यार्थियों की विषय को समझने की दृष्टि पर पड़ सकता है। नई पुस्तकों में समावेशन और समकालीन शैक्षिक विषयों को जगह देने की बात भी महत्वपूर्ण है। बदलते सामाजिक, तकनीकी और वैश्विक परिवेश में विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक राजनीतिक अवधारणाओं तक सीमित रखने के बजाय वर्तमान चुनौतियों से परिचित कराना भी शिक्षा का अहम हिस्सा बन गया है।
नई पुस्तकों के निर्माण के दौरान सबसे बड़ी चुनौती विषय-वस्तु में संतुलन बनाए रखना होगी। भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को उचित स्थान देने के साथ संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विविधता जैसे विषयों को भी समान गंभीरता से प्रस्तुत करना जरूरी होगा। आखिरकार, स्कूली पाठ्यपुस्तकें केवल परीक्षा की तैयारी का माध्यम नहीं होती, बल्कि वे विद्यार्थियों की सोच और सामाजिक समझ को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए 11वीं और 12वीं की राजनीतिक विज्ञान की नई किताबों पर शिक्षकों, विद्यार्थियों और शिक्षा विशेषज्ञों की नजर रहेगी।
नई टीम के गठन से यह संकेत स्पष्ट है कि एनसीईआरटी राजनीतिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों को नए शैक्षिक दृष्टिकोण के अनुरूप ढालने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अब देखना होगा कि नवंबर तक तैयार होने वाली 11वीं की पुस्तक में बदलाव किस रूप में सामने आते हैं और 2027 में 12वीं की पुस्तक किस नए शैक्षिक दृष्टिकोण को विद्यार्थियों के सामने रखती है।

