पानपान मसाला प्लास्टिक पैकिंग में नहीं बिकेगा

Jitendra Kumar Sinha
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पान मसाला खाने वालों के लिए भले ही उत्पाद वही रहेगा, लेकिन अब उसकी पैकिंग का रूप बदलने वाला है। सरकार ने पान मसाला की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक और कई अन्य कृत्रिम सामग्रियों पर रोक लगा दी है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने इस संबंध में नया नियम लागू किया है। इसका सीधा असर पान मसाला बनाने और बेचने वाली कंपनियों पर पड़ेगा, जिन्हें अपनी पैकेजिंग व्यवस्था में बदलाव करना होगा।


नये नियम के तहत पान मसाला की पैकिंग में प्लास्टिक, पॉलीथीन, पीवीसी, सिंथेटिक पॉलिमर और प्लास्टिक लैमिनेट जैसी सामग्रियों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा एल्युमिनियम फॉयल तथा मेटल की परत वाली पैकिंग पर भी रोक लगायी गयी है। अब पान मसाला कंपनियों को ऐसी पैकिंग सामग्री अपनानी होगी, जिसमें प्लास्टिक का इस्तेमाल न हो। सरकार का यह कदम खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग को लेकर निर्धारित मानकों को और सख्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


नये प्रावधानों के बाद पान मसाला की पैकिंग के लिए प्लास्टिक रहित कागज, पेपरबोर्ड, सेलूलोज और अन्य प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकेगा। कंपनियों को ऐसी पैकेजिंग तैयार करनी होगी, जो उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा को बनाये रखने के साथ पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहतर हो। कागज और पेपरबोर्ड आधारित पैकिंग पहले से ही कई खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल होती है। अब पान मसाला उद्योग को भी इसी दिशा में आगे बढ़ना होगा। हालांकि उत्पाद को नमी, हवा और बाहरी प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए कंपनियों को नयी तकनीक और पैकेजिंग डिजाइन पर काम करना पड़ेगा।


सरकार ने केवल कागज आधारित पैकिंग को ही विकल्प नहीं बनाया है। नये नियमों के तहत टिन के डिब्बे और कांच के कंटेनर में भी पान मसाला पैक किया जा सकता है। इससे कंपनियों के पास पैकेजिंग के कई विकल्प उपलब्ध रहेंगे। टिन और कांच की पैकिंग अपेक्षाकृत मजबूत होती है और कुछ परिस्थितियों में उत्पाद को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है। हालांकि इन विकल्पों की लागत, वजन और परिवहन से जुड़ी चुनौतियां कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण होंगी।


एफएसएसएआइ का यह नया प्रावधान 10 अगस्त 2026 को गजट में प्रकाशित होने के साथ ही प्रभावी हो गया है। यानी अब पान मसाला निर्माताओं को निर्धारित नये पैकेजिंग मानकों का पालन करना होगा। नये नियम के लागू होने के बाद कंपनियों को अपनी उत्पादन और पैकेजिंग प्रक्रिया की समीक्षा करनी पड़ेगी। पैकेजिंग सामग्री के साथ मशीनरी, डिजाइन, आपूर्ति व्यवस्था और उत्पाद की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है।


पान मसाला उद्योग में छोटे से लेकर बड़े स्तर तक अनेक निर्माता काम करते हैं। ऐसे में सभी कंपनियों के लिए अचानक पैकेजिंग व्यवस्था बदलना आसान नहीं होगा। विशेष रूप से ऐसी कंपनियों के सामने चुनौती अधिक हो सकती है, जो लंबे समय से प्लास्टिक आधारित छोटे पैकेटों का इस्तेमाल करती आ रही हैं। उन्हें नयी पैकेजिंग सामग्री की उपलब्धता, उत्पादन लागत और बाजार में आपूर्ति जैसे मुद्दों पर काम करना होगा। साथ ही पैकिंग का आकार और स्वरूप बदलने से वितरण व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।


प्लास्टिक पैकेजिंग पर रोक का एक महत्वपूर्ण पहलू पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है। खाद्य और उपभोक्ता उत्पादों की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक बड़ी मात्रा में कचरे के रूप में सामने आता है। पान मसाला के छोटे-छोटे पैकेट भी इस्तेमाल के बाद कचरे का हिस्सा बनते हैं। ऐसे में प्लास्टिक मुक्त पैकेजिंग को बढ़ावा देने से प्लास्टिक कचरे को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। प्राकृतिक और कागज आधारित सामग्री के इस्तेमाल से पैकेजिंग क्षेत्र में भी पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को प्रोत्साहन मिल सकता है।


नये नियमों के बाद आने वाले समय में दुकानों पर पान मसाला के पैकेटों का स्वरूप बदला हुआ दिखाई दे सकता है। कंपनियां नये नियमों के अनुरूप पैकेजिंग तैयार करेंगी और उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे नये प्रकार के पैकेट या कंटेनर देखने को मिलेंगे। सरकार के इस फैसले से एक ओर पान मसाला उद्योग के लिए बदलाव की चुनौती पैदा हुई है, तो दूसरी ओर प्लास्टिक मुक्त पैकेजिंग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब यह देखना होगा कि कंपनियां नयी व्यवस्था को कितनी तेजी से अपनाती हैं और बाजार में इसका क्या असर पड़ता है।


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