असम के दुर्गम इलाकों में अब ड्रोन से पहुंचेगा पार्सल

Jitendra Kumar Sinha
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देश में डाक वितरण व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में इंडिया पोस्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। असम के दूर-दराज और दुर्गम क्षेत्रों में ब्रांच पोस्ट ऑफिसों तक डाक और पार्सल पहुंचाने के लिए ड्रोन तकनीक का ट्रायल शुरू किया गया है। इस पहल से उन इलाकों में डाक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज और अधिक सुगम होने की उम्मीद है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पारंपरिक परिवहन व्यवस्था को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।


इंडिया पोस्ट ने स्काई एयर मोबिलिटी के सहयोग से ड्रोन आधारित डिलीवरी सिस्टम की शुरुआत की है। इसके तहत असम में करीब 40 अलग-अलग रूटों को कवर करने की योजना है। ड्रोन के माध्यम से डाक और पार्सल को निर्धारित स्थानों तक पहुंचाया जाएगा। इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि जिन रास्तों पर सड़क मार्ग से पहुंचने में अधिक समय लगता है, वहां हवाई मार्ग से सामान अपेक्षाकृत कम समय में पहुंचाया जा सकेगा। यह प्रयोग केवल डाक पहुंचाने की तकनीक में बदलाव नहीं है, बल्कि देश की पारंपरिक डाक व्यवस्था को भविष्य की तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है।


असम में शुरू हुआ यह प्रयोग एक बड़े ड्रोन नेटवर्क का हिस्सा है। असम और हिमाचल प्रदेश में कुल 150 रूटों को ड्रोन आधारित डाक वितरण व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। दोनों राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां इस तरह की तकनीक के प्रयोग के लिए महत्वपूर्ण हैं। विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों, घने जंगलों और ऐसे स्थानों पर जहां सड़क संपर्क सीमित है, ड्रोन तकनीक डाक वितरण की पूरी व्यवस्था को नया स्वरूप दे सकती है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले समय में देश के अन्य दुर्गम इलाकों में भी इसका विस्तार संभव है।


असम के कई इलाकों में भौगोलिक परिस्थितियां डाक और पार्सल की नियमित आवाजाही को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। बारिश, बाढ़, खराब सड़कें और लंबी दूरी जैसी परिस्थितियों में डाक पहुंचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है। ड्रोन इन चुनौतियों को काफी हद तक कम कर सकते हैं। सड़क मार्ग की आवश्यकता के बिना निर्धारित हवाई मार्ग से डाक को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। इससे समय की बचत होने के साथ-साथ डिलीवरी की विश्वसनीयता भी बढ़ सकती है।


ड्रोन आधारित डिलीवरी सिस्टम की एक खासियत इसकी ट्रैकिंग क्षमता भी है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से ड्रोन की उड़ान और डिलीवरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा सकती है। इससे डाक और पार्सल के रास्ते तथा उनकी डिलीवरी की स्थिति को बेहतर तरीके से ट्रैक करना संभव होगा। यह सुविधा ग्राहकों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। पार्सल कहां पहुंचा, उसकी डिलीवरी कब हुई और निर्धारित स्थान तक वह किस प्रक्रिया से पहुंचा—इन तमाम जानकारियों को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा सकेगा।


भारत में डाक व्यवस्था का नेटवर्क लंबे समय से गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। अब ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक के जुड़ने से इस नेटवर्क की क्षमता और बढ़ सकती है। ई-कॉमर्स के विस्तार के दौर में पार्सल की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में तेज और भरोसेमंद डिलीवरी व्यवस्था की जरूरत भी बढ़ी है। ड्रोन तकनीक इस जरूरत को पूरा करने में सहायक बन सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पारंपरिक परिवहन व्यवस्था महंगी या समय लेने वाली होती है।


असम में शुरू हुआ ड्रोन ट्रायल यह संकेत देता है कि आने वाले समय में डाक वितरण केवल सड़क और रेल नेटवर्क पर निर्भर नहीं रहेगा। तकनीक के विस्तार के साथ आसमान भी डाक सेवा का नया मार्ग बन सकता है। यदि 40 रूटों वाला असम का प्रयोग सफल रहता है और प्रस्तावित 150 रूटों का नेटवर्क प्रभावी ढंग से काम करता है, तो देश में ड्रोन आधारित डाक वितरण के विस्तार की संभावनाएं और मजबूत होंगी। दूर-दराज के लोगों तक तेज, विश्वसनीय और ट्रैक करने योग्य डाक सेवा पहुंचाने की दिशा में यह प्रयोग एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


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