भरतपुर के प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में इन दिनों पक्षी प्रेमियों के लिए एक खास आकर्षण देखने को मिला है। उद्यान के एल ब्लॉक में दुर्लभ लाल मूंछ वाली बुलबुल दिखाई दी है। सामान्य तौर पर ऊंचाई वाले नम और सदाबहार वन क्षेत्रों में पाई जाने वाली इस बुलबुल का भरतपुर जैसे अपेक्षाकृत कम ऊंचाई वाले क्षेत्र में नजर आना पक्षी विशेषज्ञों के लिए भी उत्सुकता का विषय बन गया है। पक्षी विशेषज्ञ और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर दाऊ दयाल शर्मा ने इस दुर्लभ पक्षी को अपने कैमरे में कैद किया। इसकी तस्वीर सामने आने के बाद पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों में उत्साह बढ़ गया है। केवलादेव में देश-विदेश से बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमी पहुंचते हैं और दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी उनके लिए किसी सौगात से कम नहीं होती।
लाल मूंछ वाली बुलबुल अपनी आकर्षक बनावट के कारण आसानी से पहचानी जा सकती है। इसके चेहरे के आसपास लाल रंग के विशिष्ट धब्बे होते हैं, जो इसे दूसरी बुलबुल प्रजातियों से अलग पहचान देते हैं। सिर पर मौजूद काली और नुकीली कलगी इसकी खूबसूरती में और इजाफा करती है। इसके गालों का सफेद रंग काले सिर के साथ खास कंट्रास्ट बनाता है। लाल रंग के निशान और सफेद गाल दूर से भी इसकी पहचान में मदद करते हैं। यही विशिष्ट शारीरिक विशेषताएं इसे पक्षी प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच आकर्षण का केंद्र बनाती हैं।
लाल मूंछ वाली बुलबुल मूल रूप से एशिया की निवासी प्रजाति है। इसका प्राकृतिक आवास सामान्यतया 500 से 2000 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्र माने जाते हैं। नम और सदाबहार वन, बाग-बगीचे तथा झाड़ीदार इलाके इसके पसंदीदा आवास हैं। ऐसे में भरतपुर में इसका दिखाई देना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 183 मीटर ही है। यानी जिस तरह के ऊंचाई वाले इलाकों में इस पक्षी को सामान्य तौर पर देखा जाता है, उसके मुकाबले केवलादेव काफी नीचे स्थित है। यही असामान्य भौगोलिक परिस्थिति इस रिकॉर्ड को और रोचक बना देती है। विशेषज्ञों के लिए यह जानना दिलचस्प होगा कि पक्षी यहां किस परिस्थिति में पहुंचा और कितने समय तक इस क्षेत्र में रुका।
भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान दुनिया के प्रमुख पक्षी आवासों में शामिल है। यहां अलग-अलग मौसम में देशी और प्रवासी पक्षियों की अनेक प्रजातियां दिखाई देती हैं। जलाशयों, दलदली क्षेत्रों, घासभूमियों, पेड़ों और झाड़ियों से बनी विविध पारिस्थितिकी यहां पक्षियों को अलग-अलग तरह के आवास उपलब्ध कराती है। यही जैव विविधता केवलादेव को पक्षी अवलोकन के लिए विशेष बनाती है। कई बार ऐसे पक्षी भी यहां दिखाई दे जाते हैं, जिनका इस क्षेत्र में दिखना सामान्य नहीं माना जाता। लाल मूंछ वाली बुलबुल का दिखाई देना इसी तरह की असाधारण घटना के रूप में देखा जा रहा है।
लाल मूंछ वाली बुलबुल की मौजूदगी का एक और महत्व है। इसे केवलादेव में दर्ज होने वाली तीसरी बुलबुल प्रजाति बताया गया है। इससे उद्यान की पक्षी विविधता का दायरा और समृद्ध होता है। एक ही क्षेत्र में अलग-अलग बुलबुल प्रजातियों की मौजूदगी यह भी बताती है कि यहां उपलब्ध वनस्पति और आवास पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों को आकर्षित करने में सक्षम हैं। विशेषज्ञों के लिए ऐसे रिकॉर्ड किसी क्षेत्र की जैव विविधता को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वन्यजीव फोटोग्राफर दाऊ दयाल शर्मा द्वारा इस पक्षी को कैमरे में कैद किया जाना भी महत्वपूर्ण है। जंगल में दुर्लभ पक्षी को देखना जितना मुश्किल होता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण उसे सही समय पर कैमरे में रिकॉर्ड करना होता है। लाल मूंछ वाली बुलबुल का यह रिकॉर्ड पक्षी प्रेमियों के लिए केवल एक खूबसूरत तस्वीर नहीं, बल्कि केवलादेव की समृद्ध जैव विविधता का एक और प्रमाण है।
लाल मूंछ वाली बुलबुल की मौजूदगी ने केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को लेकर पक्षी प्रेमियों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। विशेषज्ञ अब इस बात पर भी नजर रख सकते हैं कि यह पक्षी केवल गुजरते हुए यहां पहुंचा है या कुछ समय तक इस क्षेत्र में ठहरने वाला है। प्रकृति में पक्षियों का आवागमन कई बार मौसम, भोजन, आवास और पर्यावरणीय परिस्थितियों से प्रभावित होता है। इसलिए इस दुर्लभ बुलबुल का भरतपुर पहुंचना प्रकृति के बदलते व्यवहार को समझने का एक रोचक अवसर भी है। केवलादेव की पहचान ही ऐसे अनपेक्षित प्राकृतिक आश्चर्यों से है। 183 मीटर की ऊंचाई पर लाल मूंछ वाली बुलबुल का दिखाई देना इसी बात का प्रमाण है कि प्रकृति अपनी सीमाएं कभी-कभी हमारी कल्पना से कहीं आगे तक बढ़ा देती है।

