सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के लिए कर्नाटक सरकार जल्द ही ‘संध्या किरण’ स्वास्थ्य योजना लागू करने की तैयारी में है। इस योजना का उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों पर इलाज एवं चिकित्सा खर्च का आर्थिक बोझ कम करना है। स्वास्थ्य सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में राज्य सरकार की यह पहल बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ती हैं। सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय का मुख्य स्रोत पेंशन होने के कारण महंगे इलाज का खर्च कई बुजुर्गों के लिए बड़ी चिंता बन जाता है। खासकर गंभीर बीमारी, लंबे समय तक चलने वाले उपचार और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में चिकित्सा खर्च परिवार के बजट पर भारी पड़ सकता है। ऐसे में ‘संध्या किरण’ योजना के जरिए सरकार सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी आर्थिक राहत देने की दिशा में कदम उठा रही है। योजना के लागू होने के बाद पेंशनभोगियों को इलाज के खर्च को लेकर कुछ हद तक आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यू. टी. खादर ने बताया कि ‘संध्या किरण’ योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है और इसे जल्द ही पूरी तरह लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उपचार पर होने वाले खर्च को कम करना है। मंत्री के अनुसार, सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में कई ऐसी पहलों पर काम कर रही है, जिनका सीधा लाभ आम लोगों को मिल सके। इसी क्रम में सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित ‘संध्या किरण’ योजना को प्रमुख पहल के रूप में देखा जा रहा है।
सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों की नियमित वेतन आय समाप्त हो जाती है। हालांकि पेंशन से रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती हैं, लेकिन अचानक आने वाला बड़ा चिकित्सा खर्च आर्थिक परेशानी पैदा कर सकता है। बुजुर्गों में हृदय रोग, मधुमेह, रक्तचाप, हड्डियों से जुड़ी समस्याएं और अन्य उम्र संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए लगातार चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में सरकार की स्वास्थ्य योजना पेंशनभोगियों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकती है। इससे न केवल उपचार की सुविधा बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भविष्य में होने वाले चिकित्सा खर्च को लेकर मानसिक चिंता भी कम हो सकती है।
सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने की भी तैयारी की है। राज्य के भीड़भाड़ वाले और ट्रैफिक जाम से प्रभावित शहरों में बाइक एंबुलेंस सेवा शुरू की जाएगी। शहरों में गंभीर मरीज तक सामान्य एंबुलेंस के पहुंचने में कई बार ट्रैफिक जाम के कारण काफी समय लग जाता है। आपात स्थिति में यही देरी मरीज के लिए गंभीर साबित हो सकती है। बाइक एंबुलेंस इस समस्या का व्यावहारिक समाधान बन सकती है।
बाइक एंबुलेंस का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वह संकरी और भीड़भाड़ वाली सड़कों से अपेक्षाकृत तेजी से निकल सकेगी। दुर्घटना, हार्ट अटैक या अन्य आपात स्थितियों में शुरुआती चिकित्सा सहायता जितनी जल्दी मिले, मरीज के लिए उतना ही बेहतर होता है। बाइक एंबुलेंस के जरिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मौके पर पहुंचकर मरीज को प्राथमिक चिकित्सा दे सकते हैं और जरूरत पड़ने पर सामान्य एंबुलेंस के पहुंचने तक जरूरी सहायता उपलब्ध करा सकते हैं। इससे आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ सकती है।
‘संध्या किरण’ स्वास्थ्य योजना और बाइक एंबुलेंस सेवा दोनों को जल्द पूरी तरह लागू करने की तैयारी है। एक योजना जहां सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के स्वास्थ्य खर्च को कम करने पर केंद्रित है, वहीं दूसरी का लक्ष्य आपातकाल में मरीजों तक चिकित्सा सहायता तेजी से पहुंचाना है। सरकार की इन दोनों पहलों का व्यापक उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और मरीज-केंद्रित बनाना है। यदि योजनाएं तय समय के अनुसार जमीन पर उतरती हैं, तो एक ओर हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को चिकित्सा खर्च में राहत मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर महानगरों के ट्रैफिक के बीच आपात मरीजों तक तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी।

