एसबीआई - अब महीने में चार बार ही कर सकते हैं ब्रांच से मुफ्त कैश निकासी

Jitendra Kumar Sinha
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भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट यानी बीएसबीडी खातों से नकद निकासी के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। यह संशोधित नियम 1 अक्टूबर से लागू होगा। इसके तहत बीएसबीडी खाताधारकों को बैंक की शाखा से महीने में केवल चार बार मुफ्त नकद निकासी की सुविधा मिलेगी। चार निकासी के बाद यदि ग्राहक शाखा से नकदी निकालता है तो प्रत्येक अतिरिक्त निकासी पर 15 रुपये और उस पर लागू जीएसटी देना होगा। यह बदलाव खास तौर पर उन ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो जीरो बैलेंस या न्यूनतम बैलेंस की चिंता से मुक्त बीएसबीडी खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों में बड़ी संख्या में आम नागरिक, कम आय वाले परिवार और बैंकिंग सुविधा से जुड़े नए ग्राहक शामिल हैं।


बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट खाता सामान्य बैंकिंग सुविधाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसमें खाताधारक को न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की बाध्यता नहीं होती। यही वजह है कि आर्थिक रूप से कमजोर और नियमित आय नहीं रखने वाले लोगों के बीच इस तरह के खातों की लोकप्रियता रही है। बीएसबीडी खाते का उद्देश्य बैंकिंग व्यवस्था को आम आदमी के लिए सरल और सुलभ बनाना है। खाते के जरिए ग्राहक जमा, निकासी और अन्य बुनियादी बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकता है।


एसबीआई के संशोधित नियम के मुताबिक, खाताधारक महीने में चार बार तक शाखा से नकद निकासी बिना अतिरिक्त शुल्क के कर सकेगा। इसके बाद पांचवीं और उससे आगे की प्रत्येक शाखा निकासी पर शुल्क लागू होगा। मसलन, यदि कोई ग्राहक एक महीने में छह बार शाखा जाकर नकदी निकालता है, तो पहली चार निकासी मुफ्त रहेंगी। पांचवीं और छठी निकासी पर निर्धारित शुल्क देना पड़ेगा। इससे उन ग्राहकों को अपनी नकदी जरूरतों की पहले से योजना बनाने की जरूरत होगी, जो बार-बार थोड़ी-थोड़ी रकम निकालते हैं।


नए नियम के तहत चार मुफ्त निकासी के बाद प्रत्येक अतिरिक्त निकासी पर 15 रुपये तथा जीएसटी का भुगतान करना होगा। यानी बार-बार शाखा से नकदी निकालने वाले ग्राहकों के लिए छोटी-छोटी निकासी भी अतिरिक्त खर्च का कारण बन सकती है। इसका असर विशेष रूप से उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जो डिजिटल बैंकिंग का कम इस्तेमाल करते हैं और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बैंक शाखा से नकद राशि निकालना पसंद करते हैं।


इस बदलाव का सबसे बड़ा असर ऐसे खाताधारकों पर पड़ने की संभावना है, जिनकी बैंकिंग आदत अभी भी नकदी आधारित है। ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे कस्बों और कम डिजिटल सुविधा वाले इलाकों में कई लोग बैंक शाखाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे ग्राहकों के लिए चार मुफ्त निकासी की सीमा महत्वपूर्ण होगी। उन्हें अब बार-बार शाखा जाने के बजाय जरूरत के मुताबिक एक साथ अधिक राशि निकालने की योजना बनानी पड़ सकती है।


नियम में बदलाव का एक अप्रत्यक्ष प्रभाव डिजिटल बैंकिंग के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के रूप में भी सामने आ सकता है। मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम और अन्य डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल से ग्राहक शाखा में जाकर नकदी निकालने की जरूरत कम कर सकते हैं। हालांकि, डिजिटल भुगतान की सुविधा हर व्यक्ति तक समान रूप से नहीं पहुंची है। बुजुर्गों, तकनीक से कम परिचित लोगों और कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों के ग्राहकों के लिए नकद लेन-देन अभी भी महत्वपूर्ण है।


नए नियम के बाद बीएसबीडी खाताधारकों को अपनी नकदी जरूरतों का बेहतर प्रबंधन करना होगा। बार-बार छोटी राशि निकालने के बजाय महीने की आवश्यकताओं का अनुमान लगाकर निकासी करना अतिरिक्त शुल्क से बचने का एक तरीका हो सकता है। साथ ही ग्राहकों को यह भी समझना होगा कि शाखा से होने वाली निकासी और अन्य उपलब्ध बैंकिंग माध्यमों के नियम अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी भी लेन-देन से पहले एसबीआई की आधिकारिक शुल्क-सूची और अपने खाते पर लागू शर्तों की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।


एसबीआई का यह संशोधन केवल शुल्क में बदलाव नहीं है, बल्कि यह ग्राहकों की बैंकिंग आदतों को भी प्रभावित कर सकता है। नियमित रूप से शाखा से नकदी निकालने वाले ग्राहकों को अब अपनी जरूरत और निकासी की संख्या के बीच संतुलन बनाना होगा। एक तरफ इससे डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिल सकता है, वहीं दूसरी तरफ नकदी पर निर्भर ग्राहकों के लिए अतिरिक्त लागत बढ़ सकती है। ऐसे में 1 अक्टूबर से लागू होने वाला यह बदलाव बीएसबीडी खाताधारकों के लिए महत्वपूर्ण होगा। ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि वे नए नियम को समझें, अपनी निकासी की योजना बनाएं और अनावश्यक शुल्क से बचने के लिए उपलब्ध बैंकिंग विकल्पों का समझदारी से इस्तेमाल करें।


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