ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से पटना जिले में बड़े पैमाने पर विकास योजनाओं को पूरा करने की तैयारी की जा रही है। विकसित भारत-जी राम जी के तहत जिले में करीब 16 हजार छोटी-बड़ी योजनाओं को पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें लगभग छह हजार पुरानी योजनाएं हैं, जबकि 10 हजार नई योजनाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।
इन योजनाओं में गांवों की जरूरतों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। ग्रामीण इलाकों में पीसीसी सड़क और नाला निर्माण के साथ मिट्टी भराई का काम कराया जाएगा। इसके अलावा आहर, पइन, तालाब और कुओं के जीर्णोद्धार पर भी जोर दिया जाएगा। जल संरक्षण और भूजल स्तर को बेहतर बनाने के लिए सोख्ता निर्माण की योजनाएं भी शामिल हैं। वहीं जरूरत के अनुसार छोटे डैम सहित जल संचयन से जुड़ी संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। इससे एक ओर जहां ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाएं विकसित होंगी, वहीं दूसरी ओर बारिश के पानी के संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सूत्रों के अनुसार, योजनाओं पर कल हीं 10 अगस्त से नए सिरे से काम शुरू किया गया है। इसके लिए संबंधित स्तर पर योजनाओं की प्राथमिकता तय करने और मजदूरों को काम उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। योजनाओं को समय पर पूरा कराने के लिए मानव दिवस बढ़ाने की भी संभावना जतायी जा रही है। खासकर पिछले वर्ष चयनित लेकिन अब तक पूरी नहीं हो सकी योजनाओं के लिए अतिरिक्त मानव दिवस उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है।
योजनाओं के क्रियान्वयन में मनरेगा मजदूरों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके तहत जिले में निबंधित मनरेगा मजदूरों को 125 दिनों तक काम उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इससे ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने के साथ उनकी आय में भी सहायता मिलने की उम्मीद है। मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऐसी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाता है, जिनका लंबे समय तक स्थानीय लोगों को लाभ मिल सके। सड़क, जल संरक्षण संरचना, तालाब और नालों जैसे कार्य इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
पिछले साल चयनित योजनाओं को पूरा कराने के लिए करीब 11 लाख मानव दिवस का प्रावधान किए जाने की बात सामने आयी है। इसका उद्देश्य अधूरी योजनाओं को जल्द से जल्द पूरा कर ग्रामीणों को उनका लाभ उपलब्ध कराना है। मानव दिवस बढ़ने से बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूरों को काम मिलने की संभावना है। साथ ही लंबे समय से लंबित योजनाओं के पूरा होने से ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों की गति भी बढ़ सकती है।
16 हजार योजनाओं का क्रियान्वयन केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। स्थानीय स्तर पर मजदूरों को रोजगार मिलने से गांवों में आय का प्रवाह बढ़ेगा। वहीं सड़क, नाला और जल संरचनाओं के निर्माण से कृषि और ग्रामीण जीवन से जुड़ी गतिविधियों को भी सुविधा मिलेगी। विशेष रूप से आहर-पइन और तालाबों के जीर्णोद्धार से जल संरक्षण तथा सिंचाई व्यवस्था को लाभ मिलने की उम्मीद है। सोख्ता और डैम जैसी संरचनाएं वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन में उपयोगी साबित हो सकती है।
पटना जिले में विकसित भारत-जी राम जी के तहत 16 हजार योजनाओं को शामिल करना ग्रामीण विकास के लिहाज से बड़ा अभियान माना जा रहा है। 10 हजार नई योजनाओं के साथ छह हजार पुरानी योजनाओं को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।एक तरफ इन योजनाओं से गांवों में जरूरी आधारभूत संरचनाएं तैयार होंगी, वहीं दूसरी तरफ मनरेगा के माध्यम से स्थानीय श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। यदि निर्धारित समय सीमा में योजनाएं पूरी होती हैं तो पटना जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, जल संरक्षण और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के विकास को नई गति मिल सकती है।

