यात्रियों का सफर होगा आसान - बिहार-यूपी के बीच 14 नए बस रूट

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच सड़क परिवहन को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। दोनों राज्यों के बीच जल्द ही 14 नए अंतरराज्यीय मार्गों पर बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) की बसों का परिचालन शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही पिछले करीब 10 वर्षों से संचालित हो रहे 25 पुराने अंतरराज्यीय बस मार्गों के समझौते को आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। इस संबंध में सोमवार को लखनऊ में बिहार के परिवहन मंत्री दामोदर रावत और उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में दोनों राज्यों के बीच सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने, नए मार्गों को जोड़ने और मौजूदा बस सेवाओं को निरंतर बनाए रखने पर विस्तार से चर्चा हुई।


बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग विभिन्न कारणों से यात्रा करते हैं। रोजगार, शिक्षा, व्यापार, इलाज, पारिवारिक और सामाजिक कार्यों के लिए दोनों राज्यों के शहरों के बीच लोगों का लगातार आवागमन होता है। ऐसे में नए बस मार्ग शुरू होने से यात्रियों को सीधा और सुविधाजनक परिवहन विकल्प मिलने की उम्मीद है। अभी कई यात्रियों को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचने के लिए बस बदलनी पड़ती है या निजी वाहनों एवं अन्य साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। अंतरराज्यीय बस सेवाओं का विस्तार होने से ऐसे यात्रियों को विशेष राहत मिल सकती है।


बैठक में केवल नए मार्गों को लेकर ही सहमति नहीं बनी, बल्कि पहले से चल रहे 25 अंतरराज्यीय मार्गों को भी आगे जारी रखने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला हुआ है। इन मार्गों पर पिछले लगभग एक दशक से बसों का परिचालन किया जा रहा है। दोनों राज्यों के बीच परिवहन समझौते को आगे बढ़ाने से यात्रियों के लिए मौजूदा सेवाओं में निरंतरता बनी रहेगी। इससे उन लोगों को भी राहत मिलेगी जो लंबे समय से इन बस सेवाओं पर निर्भर हैं।


बिहार और उत्तर प्रदेश भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए राज्य हैं। दोनों राज्यों की सीमा से लगे जिलों के लोगों के बीच सामाजिक और आर्थिक संबंध भी काफी मजबूत हैं। बड़ी संख्या में परिवारों, कारोबारियों, विद्यार्थियों और कामगारों का दोनों राज्यों के बीच आना-जाना होता है। ऐसे में अंतरराज्यीय बस सेवा केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच आर्थिक और सामाजिक संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। नए मार्गों के खुलने से सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ दूसरे शहरों के लोगों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।


अंतरराज्यीय मार्गों पर सरकारी बस सेवाओं का विस्तार होने से यात्रियों को निजी बस ऑपरेटरों के अलावा एक और विकल्प मिलेगा। सरकारी परिवहन सेवाओं में निर्धारित किराया, नियमित संचालन और अपेक्षाकृत व्यवस्थित यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहता है। यदि नए मार्गों पर पर्याप्त संख्या में बसें और सुविधाजनक समय-सारणी उपलब्ध कराई जाती है, तो इसका सीधा लाभ रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को मिल सकता है।


बिहार के परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने बैठक के बाद कहा कि नए मार्गों के जुड़ने से रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को काफी सहूलियत मिलेगी। उनका कहना है कि दोनों राज्यों के बीच परिवहन संपर्क बढ़ने से यात्रियों की आवाजाही अधिक सुगम होगी। यह पहल खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिन्हें नौकरी, कारोबार, शिक्षा या अन्य जरूरी कार्यों के सिलसिले में नियमित रूप से बिहार से उत्तर प्रदेश या उत्तर प्रदेश से बिहार की यात्रा करनी पड़ती है।


अब यात्रियों की नजर नए 14 मार्गों पर बस परिचालन शुरू होने की तारीख, रूट, किराया और समय-सारणी की आधिकारिक घोषणा पर है। यदि इन सेवाओं को यात्रियों की जरूरत के अनुरूप समय और पर्याप्त बसों के साथ शुरू किया जाता है, तो बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है। कुल मिलाकर, 14 नए अंतरराज्यीय बस मार्गों की शुरुआत और 25 पुराने मार्गों को जारी रखने की सहमति दोनों राज्यों के यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल यात्रा आसान होने की उम्मीद है, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन, व्यापार और सामाजिक संपर्क को भी गति मिल सकती है।


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