हथेली में समा जाने वाला 100 ग्राम का नन्हा बंदर - “पिग्मी मार्मोसेट”

Jitendra Kumar Sinha
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दुनिया में बंदरों की अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन पिग्मी मार्मोसेट अपनी बेहद छोटी कद-काठी के कारण सबसे अनोखा माना जाता है। दक्षिण अमेरिका के घने वर्षा वनों में पाया जाने वाला यह नन्हा बंदर दुनिया के सबसे छोटे बंदरों में शामिल है। इसका आकार इतना छोटा होता है कि इसे देखकर पहली नजर में ऐसा लगता है, मानो प्रकृति ने किसी खिलौने को जीवंत कर दिया हो। इसकी लंबाई और हल्के वजन के कारण यह इंसान की हथेली में भी आसानी से समा सकता है।


पिग्मी मार्मोसेट का सबसे आकर्षक पहलू इसका बेहद कम वजन है। एक वयस्क पिग्मी मार्मोसेट का वजन लगभग 100 ग्राम के आसपास हो सकता है। इतने छोटे शरीर के बावजूद इसमें ऊर्जा और फुर्ती की कोई कमी नहीं होती। यह पेड़ों की पतली डालियों पर तेजी से दौड़ता है, अचानक छलांग लगाता है और कुछ ही क्षणों में एक डाल से दूसरी डाल तक पहुंच जाता है।


पिग्मी मार्मोसेट अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर ही बिताता है। दक्षिण अमेरिका के घने और नम जंगल इसके प्राकृतिक आवास हैं। यहां पेड़ों की ऊंची डालियां उसे भोजन तलाशने, आराम करने और शिकारियों से बचने के लिए सुरक्षित स्थान देती हैं। इसकी लंबी पूंछ पेड़ों पर चलते समय शरीर का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


इस छोटे बंदर की भोजन तलाशने की आदत भी बेहद दिलचस्प है। इसके नुकीले दांत पेड़ों की छाल में छोटे-छोटे छेद करने के लिए उपयोगी होते हैं। यह छाल को काटकर उसमें रास्ता बनाता है और वहां से निकलने वाले पेड़ के रस को चाटकर पीता है। पेड़ का रस इसके भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा पिग्मी मार्मोसेट छोटे कीड़े-मकौड़े, फल और फूल भी खाता है। यानी आकार में छोटा होने के बावजूद इसकी भोजन की आदतें काफी विविध हैं। जंगल में उपलब्ध अलग-अलग खाद्य स्रोत इसके जीवन को बनाए रखने में मदद करते हैं।


पिग्मी मार्मोसेट की सबसे बड़ी ताकत उसकी फुर्ती है। छोटे शरीर और हल्के वजन का फायदा उठाकर यह पेड़ों की पतली शाखाओं पर भी आसानी से घूम सकता है। यह तेजी से दिशा बदल सकता है और खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षित स्थान की ओर भाग जाता है। जंगल के ऊंचे पेड़ों के बीच उसकी यह क्षमता उसके अस्तित्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।


पिग्मी मार्मोसेट सामान्यतः छोटे पारिवारिक समूहों में रहना पसंद करता है। समूह के सदस्य एक-दूसरे के साथ रहते हैं और भोजन की तलाश तथा बच्चों की देखभाल में सहयोग करते हैं। इनके सामाजिक जीवन में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। छोटे आकार के बावजूद इनमें आपसी संपर्क और सहयोग की मजबूत प्रवृत्ति दिखाई देती है।


पिग्मी मार्मोसेट यह बताता है कि किसी जीव का महत्व उसके आकार से तय नहीं होता। महज करीब 100 ग्राम वजन वाला यह नन्हा बंदर जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पेड़ों के रस, फल, फूल और छोटे जीवों पर निर्भर रहते हुए यह वन्य जीवन की जटिल खाद्य श्रृंखला में अपनी भूमिका निभाता है।


पिग्मी मार्मोसेट का जीवन घने जंगलों से गहराई से जुड़ा है। इसलिए इसके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण बेहद जरूरी है। जंगल कम होंगे तो पेड़ों पर निर्भर इस छोटे जीव के लिए भोजन और सुरक्षित ठिकाने भी कम होते जाएंगे। यही कारण है कि वर्षावनों और उनकी जैव विविधता की रक्षा केवल बड़े जानवरों के लिए नहीं, बल्कि ऐसे छोटे और अनोखे जीवों के अस्तित्व के लिए भी जरूरी है। पिग्मी मार्मोसेट भले ही हथेली में समा जाने वाला बंदर हो, लेकिन इसकी जीवनशैली प्रकृति की अद्भुत विविधता की बड़ी कहानी कहती है। करीब 100 ग्राम का यह नन्हा जीव अपनी फुर्ती, परिवार-प्रेम और पेड़ों से जुड़ी अनोखी भोजन शैली के कारण वन्यजीव संसार में एक खास पहचान रखता है।


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