इस बार धार्मिक आस्था से जुड़ा एक विशेष संयोग बनने जा रहा है। महिलाओं के प्रमुख व्रत पर्व हरतालिका तीज और भगवान गणेश की आराधना का महापर्व गणेश चतुर्थी इस वर्ष एक ही दिन, 14 सितंबर को मनाए जाएंगे। तिथि भेद के कारण बने इस संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। पंडितों के अनुसार, वर्ष 2000 के बाद 26 वर्षों में यह चौथी बार है, जब दोनों प्रमुख पर्व एक ही दिन पड़ रहे हैं। इससे पहले 2004, 2011 और 2023 में भी ऐसा संयोग बन चुका है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष तिथियों की स्थिति कुछ अलग है। 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 9 मिनट तक तृतीया तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो 15 सितंबर की सुबह 7 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। उदयकाल में तृतीया तिथि होने के कारण हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा। वहीं दोपहर में चतुर्थी तिथि होने के कारण इसी दिन भगवान गणेश की स्थापना और गणेश चतुर्थी का पर्व भी मनाया जाएगा। इस तरह 14 सितंबर को दिन की शुरुआत हरतालिका तीज के व्रत और शिव-पार्वती की पूजा से होगी, जबकि दोपहर बाद गणपति आराधना का उत्सव शुरू हो जाएगा।
हरतालिका तीज विशेष रूप से महिलाओं का प्रमुख व्रत पर्व है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। इसी तप और शिव-पार्वती के पवित्र मिलन की स्मृति में महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। व्रत के दौरान सुहाग की सामग्री, फल-फूल और विशेष पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में प्रेम एवं सौहार्द की कामना करती हैं। इस बार सोमवार के दिन हरतालिका तीज पड़ने से श्रद्धालु इसे और भी शुभ मान रहे हैं। सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और हरतालिका तीज में स्वयं भगवान शिव एवं माता पार्वती की आराधना की जाती है।
हरतालिका तीज के साथ ही 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी भी मनाई जाएगी। धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश का जन्म दोपहर के समय माना गया है। चूंकि 14 सितंबर को दोपहर के समय चतुर्थी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन गणेश प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। घर-घर और सार्वजनिक पूजा पंडालों में ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के साथ भगवान गणेश का स्वागत होगा। श्रद्धालु गणेशजी को दूर्वा, मोदक, लड्डू और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करेंगे। इसके साथ ही गणेश उत्सव की शुरुआत हो जाएगी।
14 सितंबर को तिथि के इस विशेष संयोग के साथ चित्रा नक्षत्र का संयोग भी बताया जा रहा है। सोमवार, तृतीया और चतुर्थी तिथि तथा चित्रा नक्षत्र के एक साथ आने को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। यही कारण है कि इस दिन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता बनी हुई है। ऐसा संयोग पहली बार नहीं बन रहा है। वर्ष 2023 में भी हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी की तिथियों को लेकर ऐसी ही स्थिति बनी थी। उस समय भी कई स्थानों पर चतुर्थी तिथि 18 और 19 सितंबर दोनों दिन मानी गई थी। तिथि गणना की यह स्थिति भारतीय पंचांग की विशेषता को भी दर्शाती है, जहां सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि और दिन के अलग-अलग समय में बदलने वाली तिथियों के आधार पर पर्वों का निर्धारण किया जाता है।
14 सितंबर इस बार धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। एक ओर महिलाएं शिव-पार्वती की आराधना करते हुए हरतालिका तीज का व्रत रखेगी, तो दूसरी ओर दोपहर बाद घरों और पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना के साथ गणेशोत्सव की शुरुआत होगी। इस तरह एक ही दिन शिव-पार्वती की तपस्या, दांपत्य सुख की कामना और विघ्नहर्ता गणेश की आराधना का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। श्रद्धा, भक्ति और उत्सव से भरा यह दिन निश्चित रूप से धार्मिक कैलेंडर में विशेष महत्व रखने वाला होगा।

