सुधा की तर्ज पर खुलेंगे 100 फ्रेश कैच कियोस्क

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार में दूध की बिक्री के लिए सुधा के सफल मॉडल की तर्ज पर अब मछली की बिक्री को भी व्यवस्थित और आधुनिक बनाने की तैयारी है। राज्य सरकार जल्द ही प्रदेश में 100 फ्रेश कैच कियोस्क यानी ताजी मछली बिक्री केंद्र स्थापित करेगी। इस पहल का उद्देश्य शहरी उपभोक्ताओं को स्वच्छ वातावरण में ताजी मछली उपलब्ध कराना और मछली पालकों को उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मुहैया कराना है। योजना के तहत पहले चरण में 30 और दूसरे चरण में 70 कियोस्क स्थापित किए जाएंगे। पहले चरण के 30 कियोस्क का निर्माण कार्य चल रहा है और इनके जल्द ही चालू होने की उम्मीद है। सरकार की यह पहल बिहार में मत्स्य पालन और मछली कारोबार को नई दिशा देने के साथ ही उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सात निश्चय-3 के तहत संचालित इस योजना पर लगभग 10.56 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।


बिहार में सुधा के बूथों के माध्यम से दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री का एक व्यवस्थित नेटवर्क विकसित हुआ है। इसी तर्ज पर फ्रेश कैच कियोस्क के जरिए मछली की बिक्री को संगठित करने की योजना बनाई गई है। इन केंद्रों पर मछलियों के सुरक्षित भंडारण, प्रदर्शन और बिक्री के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अभी कई स्थानों पर मछलियों की बिक्री खुले बाजारों, अस्थायी दुकानों और सड़क किनारे होती है। ऐसे में स्वच्छता, तापमान नियंत्रण और मछलियों की गुणवत्ता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। फ्रेश कैच कियोस्क के संचालन से इन समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है। उपभोक्ताओं को एक निर्धारित स्थान पर साफ-सुथरे वातावरण में मछली खरीदने की सुविधा मिलेगी।


योजना को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार कियोस्क निर्माण की लागत का बड़ा हिस्सा वहन करेगी। एक फ्रेश कैच कियोस्क की निर्धारित इकाई लागत 11 लाख रुपये तय की गई है। संभावित मूल्य वृद्धि को ध्यान में रखते हुए इसकी अधिकतम लागत 13.20 लाख रुपये आंकी गई है। सरकार निर्धारित इकाई लागत के 80 प्रतिशत या वास्तविक निर्माण लागत, दोनों में से जो भी राशि कम होगी, उसका भुगतान करेगी। इससे कियोस्क निर्माण के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी और योजना को जमीन पर उतारने में सुविधा मिलेगी। कियोस्क के निर्माण के लिए एजेंसी या संवेदक का चयन निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। वहीं, इनके संचालन की जिम्मेदारी भी निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार चयनित संचालकों को सौंपी जाएगी। केंद्रों के नियमित संचालन, साफ-सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित संचालकों की होगी।


फ्रेश कैच कियोस्क स्थापित करने के लिए सरकारी भूमि, नगर निकायों की जमीन अथवा जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई भूमि का उपयोग किया जाएगा। इससे केंद्रों के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। पहले चरण में पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा, बेगूसराय, मोतिहारी, बेतिया, हाजीपुर, किशनगंज, कटिहार और मुंगेर सहित राज्य के प्रमुख शहरों में कियोस्क स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में मछली की मांग को पूरा करने और स्थानीय मत्स्य उत्पादकों को बाजार से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। योजना का क्रियान्वयन एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएआईडीसीएल) के माध्यम से किया जाएगा। निर्माण से लेकर संचालन तक निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा, ताकि केंद्रों की व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।


फ्रेश कैच कियोस्क को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इनमें मछलियों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड चेन, डीप फ्रीजर और डिस्प्ले काउंटर की व्यवस्था होगी। इसके अलावा स्वच्छ जल, जल निकासी, बिजली और बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में बैकअप की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। मछली एक जल्दी खराब होने वाला खाद्य पदार्थ है। इसलिए उसके भंडारण और बिक्री के दौरान उचित तापमान बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। कोल्ड चेन और अन्य आधुनिक सुविधाओं की मदद से मछलियों की ताजगी तथा गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलेगी। स्वच्छ जल और बेहतर जल निकासी से बिक्री केंद्रों पर साफ-सफाई सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी। इसके साथ ही डिजिटल भुगतान और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था भी की जाएगी। इससे ग्राहकों को भुगतान में सुविधा मिलेगी और मछलियों की सफाई के दौरान निकलने वाले कचरे का उचित निपटान किया जा सकेगा।


इस योजना की सफलता के लिए स्थानीय मत्स्य उत्पादकों और फ्रेश कैच कियोस्क संचालकों के बीच मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित की जाएगी। इससे मछली पालकों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर बाजार मिल सकेगा। यदि मछलियों की खरीद, परिवहन, भंडारण और बिक्री की व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित होती है, तो उत्पादकों और उपभोक्ताओं, दोनों को लाभ मिलने की संभावना है। व्यवस्थित बिक्री केंद्रों से मछली कारोबार में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। कियोस्क संचालन, परिवहन, आपूर्ति और रखरखाव जैसी गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, योजना का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र समय पर चालू हों, वहां नियमित रूप से ताजी मछलियां उपलब्ध रहें और स्वच्छता के मानकों का लगातार पालन किया जाए।


बिहार में 100 फ्रेश कैच कियोस्क की स्थापना केवल मछली बिक्री के लिए नए केंद्र खोलने की योजना नहीं है, बल्कि मत्स्य कारोबार को अधिक व्यवस्थित, स्वच्छ और उपभोक्ता अनुकूल बनाने का प्रयास भी है। सुधा की तर्ज पर विकसित होने वाला यह नेटवर्क सफल रहता है, तो इससे शहरी उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा और मत्स्य पालकों को बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि पहले चरण के 30 केंद्र जल्द शुरू हों और दूसरे चरण के 70 कियोस्क की स्थापना भी निर्धारित समय पर पूरी की जाए। उचित प्रबंधन, नियमित आपूर्ति और गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया, तो फ्रेश कैच कियोस्क बिहार में मछली बिक्री के लिए एक प्रभावी मॉडल बन सकते हैं।


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