रूस में ‘अज्ञात वायरस’ से हुई हड़कंप

Jitendra Kumar Sinha
0

 


रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक महिला लैब टेक्नीशियन की संदिग्ध मौत ने स्वास्थ्य जगत में चिंता पैदा कर दी है। इरकुत्स्क क्षेत्र में एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़ी लैब टेक्नीशियन दर्या शिपिलोवा की मौत के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर एक कथित ‘अज्ञात वायरस’ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी तक ऐसी किसी बीमारी या वायरस की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रूसी स्वास्थ्य निगरानी संस्था रोस्पोट्रेबनादजोर ने प्लेग संक्रमण की आशंका को खारिज किया है और मौत की वजह अज्ञात निमोनिया बताई है।


दर्या शिपिलोवा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद सबसे अधिक चर्चा उस कथित घटना की हो रही है, जिसमें लैब में जांच के दौरान जिंदा बैक्टीरिया वाली एक टेस्ट ट्यूब टूटने की बात कही जा रही है। अपुष्ट रिपोर्टों में दावा किया गया कि इस दुर्घटना के कारण वह संक्रमित हुई थी। यदि ऐसी घटना वास्तव में हुई हो, तो यह प्रयोगशाला सुरक्षा और जैविक संक्रमण से जुड़े प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर सकती है। खासकर ऐसी प्रयोगशालाओं में जहां खतरनाक या संभावित रूप से संक्रामक रोगाणुओं पर शोध किया जाता है, छोटी-सी लापरवाही भी बड़े खतरे का कारण बन सकती है। हालांकि, फिलहाल टेस्ट ट्यूब टूटने और महिला की बीमारी के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


इरकुत्स्क क्षेत्र में एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट का नाम सामने आने के कारण इस घटना को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई। प्लेग का इतिहास मानव सभ्यता के लिए बेहद भयावह रहा है। अतीत में इसके कारण बड़े पैमाने पर मौतें हुई हैं। यही वजह है कि प्लेग से जुड़ी किसी भी खबर को लेकर स्वाभाविक रूप से लोगों में डर पैदा हो जाता है। लेकिन किसी प्रयोगशाला में प्लेग से संबंधित अनुसंधान होना अपने आप में यह प्रमाण नहीं है कि वहां काम करने वाला व्यक्ति प्लेग से संक्रमित हुआ है। यही अंतर अफवाह और वैज्ञानिक तथ्य के बीच महत्वपूर्ण है।


रूसी स्वास्थ्य निगरानी संस्था रोस्पोट्रेबनादजोर ने प्लेग संक्रमण की आशंका को खारिज किया है। संस्था के अनुसार, महिला की मौत प्लेग के कारण नहीं हुई। प्रारंभिक जानकारी में इसे अज्ञात निमोनिया से जुड़ा मामला बताया गया है। संस्था का यह भी दावा है कि जांच किए गए नमूनों में कोई घातक रोगाणु नहीं मिला। यदि यह जानकारी सही है, तो फिलहाल किसी नए घातक संक्रमण के फैलने की बात कहना जल्दबाजी होगी। वैज्ञानिक जांच पूरी होने से पहले किसी बीमारी को ‘अज्ञात वायरस’ या ‘नया महामारी वायरस’ बताना लोगों के बीच अनावश्यक भय पैदा कर सकता है।


इस घटना में एक और महत्वपूर्ण पहलू है, वायरस और बैक्टीरिया को एक ही मान लेना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। प्लेग का कारण Yersinia pestis नामक बैक्टीरिया होता है, जबकि कई प्रकार के निमोनिया वायरस, बैक्टीरिया या अन्य कारणों से हो सकते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति की निमोनिया से मृत्यु होने का अर्थ यह नहीं है कि वह किसी नए वायरस से संक्रमित था। इसके लिए प्रयोगशाला जांच, रोगी के चिकित्सकीय रिकॉर्ड, संक्रमण के लक्षण, नमूनों की आनुवंशिक जांच और महामारी विज्ञान संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण जरूरी होता है।


यह घटना एक बार फिर उच्च जोखिम वाली जैविक प्रयोगशालाओं में सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत सामने लाती है। ऐसी जगहों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों, विशेष सुरक्षा उपकरणों, नमूनों के सुरक्षित भंडारण और दुर्घटना की स्थिति में तत्काल नियंत्रण व्यवस्था की आवश्यकता होती है। यदि किसी टेस्ट ट्यूब के टूटने की बात जांच में सही साबित होती है, तो यह भी देखा जाना जरूरी होगा कि प्रयोगशाला के सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हुआ था या नहीं।


फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दर्या शिपिलोवा की मौत को लेकर उपलब्ध जानकारी विरोधाभासी है। एक ओर अपुष्ट रिपोर्टें संक्रमण और जिंदा बैक्टीरिया वाले नमूने की बात कर रही हैं, वहीं रूसी स्वास्थ्य निगरानी संस्था प्लेग और किसी घातक रोगाणु की मौजूदगी से इनकार कर रही है। ऐसे में किसी ‘अज्ञात वायरस’ के फैलने या नई महामारी की घोषणा करना उचित नहीं होगा। वैज्ञानिक जांच के निष्कर्ष सामने आने तक संयम जरूरी है। यह घटना हालांकि एक बड़ा सबक जरूर देती है लेकिन जैविक अनुसंधान मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन ऐसे अनुसंधान में सुरक्षा से समझौते की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। अफवाहें डर पैदा कर सकती हैं, जबकि प्रमाणित विज्ञान ही यह तय कर सकता है कि खतरा वास्तव में कितना बड़ा है।


एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top