पैरों के दर्द से दस्तक दे रहा वायरल फीवर

Jitendra Kumar Sinha
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मौसम में बदलाव के साथ वायरल संक्रमण के लक्षणों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। इस बार पटना में वायरल फीवर के कई मरीजों में बुखार आने से पहले पैरों की मांसपेशियों में तेज दर्द, मरोड़, कमजोरी और शरीर टूटने जैसी शिकायत सामने आ रही है। खास बात यह है कि शुरुआत में मरीज को न तो बुखार होता है और न ही सर्दी-जुकाम। केवल पैरों में दर्द और कमजोरी महसूस होती है। इसके तीन से चार दिन बाद अचानक तेज बुखार चढ़ने की शिकायत सामने आ रही है।


वायरल संक्रमण का सामान्य पैटर्न अक्सर बुखार, गले में खराश, नाक बहना, खांसी या बदन दर्द से शुरू होता है। लेकिन इस बार कई मरीजों में पैरों का दर्द शुरुआती संकेत के रूप में सामने आ रहा है। मांसपेशियों में खिंचाव और मरोड़ इतनी तेज होती है कि कुछ मरीज इसे हड्डियों, नसों या मांसपेशियों की अलग बीमारी मान लेते हैं। कई मरीज इसी वजह से शुरुआत में हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक जांच और मरीज की पूरी हिस्ट्री लेने के बाद जब वायरल संक्रमण की आशंका होती है, तो उन्हें मेडिसिन विभाग में भेजा जा रहा है।


पटना के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में ऐसे लक्षण वाले मरीजों की संख्या लगातार सामने आ रही है। पीएमसीएच, आइजीआइएमएस, एनएमसीएच, पटना एम्स और न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। बताए गए आंकड़ों के अनुसार, पटना एम्स में प्रतिदिन करीब 115, आइजीआइएमएस में 85, पीएमसीएच में 80, एनएमसीएच में 50 और न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल में करीब 20 मरीज ऐसे लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। यानी इन अस्पतालों में ही प्रतिदिन 350 से अधिक मरीज पैरों में दर्द, कमजोरी और बाद में बुखार जैसे लक्षणों की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।


मौसम में अचानक बदलाव का असर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता और संक्रमण के प्रसार पर पड़ सकता है। तापमान में उतार-चढ़ाव, वातावरण में नमी और लोगों का एक-दूसरे के संपर्क में अधिक रहना वायरल संक्रमण फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकता है। हालांकि केवल पैरों में दर्द को वायरल फीवर का निश्चित संकेत मानना सही नहीं है। पैरों में दर्द और मांसपेशियों में मरोड़ के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए लगातार या अत्यधिक दर्द होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।


कई बार लोग पैरों में दर्द को थकान, अधिक चलने-फिरने या नसों की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यदि इसके साथ कमजोरी बढ़ रही हो और अगले कुछ दिनों में बुखार भी विकसित हो जाए, तो इसे सामान्य थकान मानकर छोड़ना उचित नहीं है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में ऐसे लक्षणों पर अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, लगातार उल्टी, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, भ्रम या पानी की कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।


वायरल संक्रमण से बचाव के लिए हाथों की नियमित सफाई, साफ पानी का सेवन, संतुलित भोजन और पर्याप्त आराम महत्वपूर्ण हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर अनावश्यक संपर्क से बचना और बीमार व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखना भी संक्रमण के जोखिम को कम कर सकता है। बुखार होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं है, क्योंकि अधिकांश वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक सीधे तौर पर लाभकारी नहीं होते। दवाओं का सेवन चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।


मौसम बदलने के इस दौर में शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पैरों की मांसपेशियों में अचानक तेज दर्द और कमजोरी वायरल संक्रमण की शुरुआत से जुड़ी हो सकती है, लेकिन इसके पीछे अन्य कारण भी संभव हैं। इसलिए लक्षणों के आधार पर स्वयं बीमारी तय करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है। पटना के अस्पतालों में बढ़ती ओपीडी यह संकेत देती है कि मौसमी संक्रमण को लेकर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। दर्द को केवल दर्द न समझें, शरीर के संकेत को समझें, समय पर जांच और सही उपचार ही बीमारी को गंभीर होने से रोकने की पहली सीढ़ी है।


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