22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई, जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया। इस पृष्ठभूमि में, तुर्की ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता भेजकर क्षेत्रीय भू-राजनीति में अपनी भूमिका को स्पष्ट किया है।
28 अप्रैल को तुर्की वायु सेना का एक C-130 हरक्यूलिस सैन्य परिवहन विमान कराची में उतरा, जिसमें हथियार और गोला-बारूद लदे थे। इसके अलावा, छह और तुर्की C-130 विमान इस्लामाबाद के एक सैन्य अड्डे पर पहुंचे, जो तुर्की-पाकिस्तान रक्षा सहयोग की गहराई को दर्शाता है।
पाकिस्तानी खुफिया सूत्रों के अनुसार, तुर्की ने पाकिस्तान को KARAOKE एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें (ATGMs) और TB-2 ड्रोन के लिए MAM-L, MAM-C और KEMANKES जैसे गोला-बारूद की आपूर्ति की है।
इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान ने तुर्की की कंपनी Baykar से Kemankeş क्रूज़ मिसाइलें खरीदी हैं, जिन्हें Bayraktar TB2 ड्रोन से लॉन्च किया जा सकता है।
यह सहयोग ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान ने भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच अपने JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों को चीन की PL-15 लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों से लैस किया है।
तुर्की और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग केवल हथियारों की आपूर्ति तक सीमित नहीं है। दोनों देशों ने तुर्की के पांचवीं पीढ़ी के KAAN लड़ाकू विमान के संयुक्त उत्पादन के लिए एक फैक्ट्री स्थापित करने की योजना बनाई है, जो भविष्य में दोनों देशों की वायु सेनाओं की क्षमताओं को बढ़ा सकता है।
भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि तुर्की और पाकिस्तान के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है। भारत को अपनी सुरक्षा रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाना होगा।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, और भारत को इन परिवर्तनों के प्रति सतर्क रहना होगा।
