22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बाईसरान घाटी में हुए आतंकवादी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान गई, जिनमें अधिकांश भारतीय नागरिक थे। हमलावरों ने पहले पुरुषों को महिलाओं और बच्चों से अलग किया और फिर करीब से गोलीबारी की, जिससे यह हमला हाल के वर्षों में सबसे घातक बन गया।
इस त्रासदी के बाद, जम्मू-कश्मीर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया, जिसमें मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, "इस हमले ने हमें भीतर से तोड़ दिया है। कश्मीरियों ने आतंक के खिलाफ आवाज उठाई है। मैंने पिछले 26 वर्षों में पहली बार देखा है कि लोग आतंक के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं।"
विधानसभा में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें कहा गया, "जम्मू-कश्मीर विधानसभा अपने सभी नागरिकों के लिए शांति, विकास और समावेशी समृद्धि का माहौल बनाने और राष्ट्र तथा जम्मू-कश्मीर के सांप्रदायिक सद्भाव और प्रगति को बाधित करने की कोशिश करने वालों के नापाक इरादों को दृढ़ता से हराने के लिए अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।"
इस हमले के बाद, कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें लोगों ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाई। श्रीनगर, पुलवामा, शोपियां, पहलगाम, अनंतनाग, बारामूला और अन्य शहरों में लोग सड़कों पर उतरे और हमले की निंदा की।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सभी मृतकों के नाम लेकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा, "हमने पर्यटकों को यहां बुलाया था। उनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी थी। हमले की निंदा करने के लिए कश्मीर के लोग बाहर आए। ये मेरे कहने पर घर के बाहर नहीं आए। ये विधायकों के कहने पर बाहर नहीं निकले। मुझे नहीं पता कि लोग घर से बाहर क्यों आए? कोई इसका क्रेडिट नहीं ले सकता है। वे घर से बाहर आए और आतंकी हमले की निंदा की।"
इस हमले ने न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अब समय आ गया है कि हम सभी मिलकर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हों और शांति, सद्भाव और विकास की दिशा में कदम बढ़ाएं।
