22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकवादी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई, जिनमें अधिकांश हिंदू थे। हमलावरों ने धार्मिक आधार पर लोगों को निशाना बनाया, जिससे यह हमला और भी भयावह बन गया।
हमले के बाद, भारतीय सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई शुरू की। अब तक लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े छह आतंकवादियों के घरों को विस्फोट कर ध्वस्त किया गया है। इनमें आसिफ शेख, आदिल ठोकेर, हारिस अहमद, अहसान उल हक, जाकिर अहमद गनई और शाहिद अहमद कुटे शामिल हैं। सेना ने त्राल, अनंतनाग, पुलवामा, कुलगाम और शोपियां में सर्च ऑपरेशन के दौरान यह कार्रवाई की।
भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया गया है, जिससे पाकिस्तान को मिलने वाला पानी रोका जा सके। इसके अलावा, पाकिस्तान के साथ व्यापारिक और राजनयिक संबंधों में भी कटौती की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई निर्णायक होगी।
हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा की शाखा 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने ली है। हालांकि, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अनुसार, इस हमले में फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास की भी भूमिका हो सकती है। NIA के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि हमास के तीन शीर्ष कमांडर—डॉ. खालिद कद्दूमी, डॉ. नाजी जहीर और मुफ्ती आजम—पिछले छह महीनों से पाकिस्तान में सक्रिय हैं और लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के संपर्क में हैं। इनकी गतिविधियों से संकेत मिलता है कि पहलगाम हमले की योजना पाकिस्तान में ही बनाई गई थी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की निंदा की गई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हमले की कड़ी आलोचना करते हुए दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान को मिलकर इस समस्या का समाधान करना चाहिए। लंदन में भारतीय समुदाय ने पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा है।
गुजरात के सूरत और अहमदाबाद में पुलिस ने घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 500 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों से घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की अपील की थी, जिसके तहत यह कार्रवाई की गई।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार है। सरकार की सख्त कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय समर्थन से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और भी तेज होगी।

