22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की हत्या के बाद, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और भारत के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। तालिबान के दोहा स्थित राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख और कतर में अफगानिस्तान के नामित राजदूत, सुहैल शाहीन ने इस हमले को 'निंदनीय' बताते हुए कहा कि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए और उन्हें सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पुतनिक इंडिया से बातचीत में इस घटना की व्यापक जांच की आवश्यकता पर बल दिया।
तालिबान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, अब्दुल कहर बल्खी ने भी इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के प्रयासों को कमजोर करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
भारत सरकार ने इस हमले के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) को जिम्मेदार ठहराया है, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ माना जाता है। हालांकि, पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि भारत बिना किसी सबूत के इस्लामाबाद पर आरोप लगा रहा है।
इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया है। भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया है और सभी पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने के लिए कहा है। पाकिस्तान ने इसके जवाब में शिमला समझौते को रद्द करने की बात कही है। इन घटनाओं के चलते दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं।
