पहलगाम आतंकी हमले के बाद - भारत की कूटनीतिक कारवाई

Jitendra Kumar Sinha
0

 



जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में, जिसे 'मिनी स्विट्ज़रलैंड' कहा जाता है, 21 अप्रैल को हुआ आतंकी हमला न सिर्फ निर्दोष पर्यटकों की जान ले लिया, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।  यह हमला निश्चित रूप से सुनियोजित होगा, क्योंकि इसका उद्देश्य सिर्फ हत्या करना नहीं हो सकता है बल्कि भारत की शांति प्रक्रिया, घाटी में लौटती रौनक और धार्मिक सौहार्द पर हमला करना होगा।


जांच एजेंसियां और खुफिया सूत्रों के का माने तो, हमले में शामिल आतंकी पाकिस्तान से पीर पंजाल रूट के माध्यम से आए थे। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े इन आतंकियों को सैफुल्लाह खालिद उर्फ सैफुल्लाह कसूरी ने प्रशिक्षत किया था, जो हाफिज सईद का सबसे करीबी बताया जा रहा है।चुकि हमला धार्मिक पहचान के आधार पर, यानि धर्म पूछ-पूछकर गोली मारी गई है, इससे यह साबित होता है कि यह हत्या भारत में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश साफ दिखती है।


सूत्रों की माने तो खुफिया एजेंसियों को इस हमले की पूर्व सूचना थी। अप्रैल की शुरुआत में ही आतंकियों के रेकी करने और पर्यटक स्थलों को निशाना बनाने की योजना की जानकारी थी। इसके बावजूद सुरक्षात्मक तैयारियों में चूक हुई। यह चूक सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबक है। 


पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने इस बार पारंपरिक जवाबी कार्रवाई से हटकर कूटनीतिक हमला शुरू किया है। सिंधु जल संधि स्थगित की गई, जबकि यह संधि ऐतिहासिक संधि है, जो अब तक भारत-पाक संबंधों की आधारशिला रही है। पाकिस्तान के सैन्य सलाहकारों को 'पर्सोना नॉन ग्राटा' (अवांछित व्यक्ति) घोषित किया गया है। भारतीय वीजा रद्द (विशेषकर SAARC समझौते के तहत दिए गए)। अटारी-वाघा बॉर्डर बंद। इस्लामाबाद स्थित भारतीय सैन्य सलाहकारों को भारत बुलाया गया। इन सबके माध्यम से भारत ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब आतंक के खिलाफ 'रणनीतिक सहनशीलता' खत्म हो रही है।


भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला ऐतिहासिक है। पाकिस्तान के पूर्वी क्षेत्रों के लिए सिंधु का पानी पाकिस्तान का जीवन रेखा है, जबकि भारत इसका अधिकांश हिस्सा इस्तेमाल किए बिना समुद्र में बहा देता है। अब पहली बार भारत ने पानी को 'रणनीतिक अस्त्र' की तरह इस्तेमाल करने का संकेत दिया है। यह निर्णय सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि वैश्विक जल कूटनीति में एक नई चेतावनी भी माना जा सकता है।


भारत की जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान वास्तव में बुरी तरह बौखला गया है। उसकी नेशनल सिक्योरिटी कमिटी की बैठक में यह फैसला लिया गया है कि शिमला समझौता और सभी द्विपक्षीय समझौते रद्द, भारतीय नागरिकों को 48 घंटे में पाकिस्तान छोड़ने का आदेश, SAARC वीजा सुविधा निलंबित, भारत के साथ सभी व्यापारिक संबंध बंद, भारतीय विमानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद, वाघा बॉर्डर पूरी तरह बंद। पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि यदि भारत सिंधु जल समझौते को रद्द करता है, तो इसे 'जंग की कार्यवाही' मानी जाएगी।


पहलगाम हमला के बाद पाकिस्तान की वायुसेना ने कराची एयरबेस से 18 फाइटर जेट्स भारत की सीमा के नजदीकी एयरबेस पर भेजा है। वहीं, 24-25 अप्रैल को कराची के पास समुद्र में मिसाइल परीक्षण की अधिसूचना जारी की है। यह सब पाकिस्तान के लिए डर और रणनीतिक दबाव को दर्शाता है।


हमले के बाद राजनीति से परे जाकर भारत के विपक्षी दलों ने सरकार के साथ रहने का समर्थन किया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह से बात कर, भारत की कार्रवाई में 'पूर्ण समर्थन' जताया है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि यह हमला देश की एकता पर कायरतापूर्ण हमला है और इसका मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और कांग्रेस नेता तारिक कर्रा ने भी हालात पर चिंता जताई है। इससे यह साफ-साफ एक संकेत गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।


हमले के गुनहगारों की तलाश में तंगमर्ग (कुलगाम) में भारतीय सेना ने जबरदस्त घेराबंदी की है। आतंकी और भारतीय सैनिकों में मुठभेड़ चल रही है और अब तक कई आतंकी मारे भी गए हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकियों की तीन स्कैच जारी किया हैं, जिसमें आसिफ फौजी, आदिल गुरी, और सुलेमान शाह शामिल हैं। इन आतंकियों के पीछे लश्कर के नेटवर्क रहने का स्पष्ट संकेत मिल रहा है।


आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सऊदी अरब से लौटते समय पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का उपयोग नहीं किया है। यह एक सूक्ष्म लेकिन तीखा संदेश था, कि भारत अब हर स्तर पर पाकिस्तान का विरोध दर्ज कराएगा, चाहे वह कूटनीति हो या फिर हवाई मार्ग।


देखा जाए तो पहलगाम हमला सिर्फ आतंक हमला नहीं था, बल्कि यह एक 'हाइब्रिड वॉर' था। क्योंकि पर्यटन उद्योग को चोट पहुंचाना, सांप्रदायिक तनाव भड़काना और घाटी में लौटती शांति प्रक्रिया को पटरी से उतारना ही इस हमले का लक्ष्य था। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद, घाटी में जो विकास की लहर उठी है, उस रफ्तार को रोकने के लिए भी यह हमला कहा जा सकता है। यह भी सच है कि इस हमले के बाद अब घाटी में चल रही विकास की गति धीमी हो सकती है।


पहलगाम हमला के बाद आम जनता, खासकर कश्मीर के निवासियों में बहुत आक्रोश है। स्थानीय लोगों ने भी आतंकियों की कायरता की पुरजोर निंदा की है। यह निंदा इस बात का संकेत लगता है कि अब कश्मीरी समाज भी घाटी के आतंक से ऊब चुका है और भारत के साथ शांति के साथ रहना और कश्मीर की विकास चाहता है।


देखा जाए तो पहलगाम आतंकी हमला देश के लिए एक बड़ी चेतावनी का संकेत है। लेकिन भारत ने इस बार कूटनीतिक हमले से जवाब देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि अब सहिष्णुता की सीमा खत्म हो चुकी है। चाहे वह सिंधु जल संधि हो या SAARC समझौता। लगता है कि अब भारत हर संधि की समीक्षा करेगी। 


इस हमला के बाद यह विचारणीय विंदू यह है कि अक्सर यह कहा जाता है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है। लेकिन इस हमले में धर्म की जांच करने बाद ही हत्या की गई है, इसलिए यह हत्याएं इस दावे को खोखला सिद्ध करती हैं। 


यदि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है, तो फिर यह कैसे हुआ कि सिर्फ एक विशेष धर्म के लोग को ही निशाने पर लिया गया। आतंकियों ने न केवल कलमा पढ़ने को मजबूर किया, बल्कि खतना की भी जांच की। क्या यह केवल आतंकवाद था या मजहबी जिहाद? यह सवाल अब बार-बार उन लोगों से पूछना होगा जो यह कहते हैं कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता है, क्योंकि अब इसी में भविष्य की सुरक्षा छिपी है।


पहलगाम की घटना केवल एक आतंकी हमला नहीं है। यह एक चेतावनी है कि मजहब के नाम पर चल रही हिंसा अब हदें पार कर रही है। यह अब जरूरी हो गया है कि भारत नरम रुख छोड़कर कड़े कदम उठाए। अब देश को यह सोचना होगा कि कब तक हम "धर्मनिरपेक्षता" के नाम पर अपनी आंखें मूंदे रहेंगे? कब तक जानें जाती रहेंगी और हम उन्हें "armed conflict" कहकर भूल जाएंगे? अब यह सही समय आ गया है, जब भारत को अपनी सुरक्षा नीति को 'निष्क्रिय प्रतिक्रियाओं' से आगे ले जाकर 'सक्रिय प्रतिकार' की दिशा में मोड़ना चाहिए। यह सही है कि देश के लिए एकजुटता सबसे बड़ी ताकत होती है और आज की तारीख में देश एकजुट है। एकजुटता के कारण कोई भी आतंकी मंशा कामयाब नहीं हो सकती है। उम्मीद है कि मजबूत, सशक्त और निर्णायक भारत की रणनीति से पहलगाम की घाटियों में फिर से पर्यटक लौटेंगे, शांति का सूरज फिर से उगेगा।

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top