बिहार सरकार ने एक अहम कदम उठाते हुए राज्य के सभी जिलों के लिए प्रभारी मंत्रियों की नई सूची जारी की है। इसका मकसद है – विकास योजनाओं की निगरानी, प्रशासनिक कार्यों में तेजी और शासन व्यवस्था को ज़्यादा मजबूत बनाना। कुल 35 मंत्रियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। ये मंत्री अब नियमित रूप से अपने-अपने जिलों का दौरा करेंगे और स्थानीय समस्याओं को मौके पर ही सुलझाने का प्रयास करेंगे।
क्या है प्रभारी मंत्री की भूमिका?
प्रभारी मंत्री को उस जिले की ज़िम्मेदारी दी जाती है जहाँ वे योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा और जनता से सीधे संवाद जैसे अहम काम करते हैं। वे जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष भी होते हैं। यानी, जिले के विकास और सुशासन में उनकी बड़ी भूमिका होती है।
किन-किन मंत्रियों को कौन से जिले दिए गए?
सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार:
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पटना – उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
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मुजफ्फरपुर – उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा
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पूर्णिया और नालंदा – जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी
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वैशाली – ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव
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कैमूर – सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार
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समस्तीपुर और मधेपुरा – ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार
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औरंगाबाद – लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन
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सारण – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सुमित कुमार सिंह
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सीवान – रेणु देवी
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दरभंगा – मंगल पाण्डेय
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कटिहार – नीरज कुमार सिंह
अन्य जिलों की जिम्मेदारियां
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सीतामढ़ी और जहानाबाद – भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी
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मधुबनी – लेसी सिंह
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सुपौल – मदन सहनी
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अररिया – उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा
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बक्सर – पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन
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खगड़िया – सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री महेश्वर हजारी
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लखीसराय – परिवहन मंत्री शीला कुमारी
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पूर्वी चंपारण – शिक्षा मंत्री सुनील कुमार
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पश्चिम चंपारण – जनजाति कल्याण मंत्री जनक राम
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अरवल – हरि सहनी
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गोपालगंज – कृष्णनंदन पासवान
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रोहतास – जयंत राज
शेष जिलों के प्रभारी मंत्री
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किशनगंज – अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. जमा खान
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जमुई – रत्नेश सादा
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भोजपुर – केदार प्रसाद गुप्ता
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बांका – सुरेन्द्र मेहता
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भागलपुर – संतोष कुमार सिंह
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बेगूसराय – संजय सरावगी
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गया – डॉ. सुनील कुमार
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नवादा – नगर विकास मंत्री जिवेश कुमार
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शेखपुरा – राजकुमार सिंह
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शिवहर – कला-संस्कृति मंत्री मोतीलाल प्रसाद
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सहरसा – विजय कुमार मंडल
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मुंगेर – आईटी मंत्री कृष्ण कुमार मंटू
क्यों की गई यह नियुक्ति?
सरकार का मानना है कि जिले स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी तभी प्रभावी हो सकती है जब कोई ज़िम्मेदार मंत्री समय-समय पर वहाँ जाकर हालात की समीक्षा करे। इन नियुक्तियों के ज़रिए सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अब “काम में ढिलाई नहीं चलेगी”।
प्रभारी मंत्री अब संबंधित जिले में नियमित दौरे करेंगे, अधिकारियों के साथ मीटिंग कर योजनाओं की समीक्षा करेंगे और यह देखेंगे कि सरकारी काम ज़मीन पर सही तरीके से हो रहा है या नहीं।
जनता को क्या फायदा?
इस नई व्यवस्था से जिलों की समस्याएं अब तेजी से सरकार के संज्ञान में आएंगी। मंत्री अपने जिले के लोगों से मिलकर उनकी परेशानियां जान सकेंगे और तुरंत समाधान के लिए प्रयास करेंगे। इससे न केवल योजनाओं की गति बढ़ेगी बल्कि लोगों को भी भरोसा होगा कि सरकार उनके साथ है।
बिहार सरकार का यह कदम सुशासन की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। अगर प्रभारी मंत्री सक्रिय भूमिका निभाएं और नियमित रूप से जिलों में दौरे करें, तो ज़रूर राज्य में विकास की रफ्तार तेज होगी और लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके जिले का प्रभारी मंत्री कौन है, तो इस सूची में उसका नाम देखकर समझ सकते हैं कि अब आपके क्षेत्र में विकास की निगरानी और तेज़ होने वाली है।
