वक्फ संशोधन विधेयक के समर्थन में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के रुख के चलते पार्टी के कुछ नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है, जिससे बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। केंद्रीय पंचायती राज मंत्री और जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, ने इन इस्तीफों को तवज्जो न देते हुए कहा है कि ये नेता राजनीतिक रूप से कम प्रभावशाली हैं।
ललन सिंह ने टिप्पणी करते हुए कहा, "कौन गया है, जिसका भारी प्रचार हो रहा है? क्या वे बहुत सीनियर लीडर हैं?" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 2020 के विधानसभा चुनाव में ये नेता पतंग चुनाव चिन्ह पर ढाका से चुनाव लड़े थे और मात्र 499 वोट प्राप्त किए थे।
पार्टी छोड़ने वालों में कासिम अंसारी, नदीम अख्तर, शाहनवाज मल्लिक, राजू नैय्यर, तबरेज सिद्दीकी और नवादा के जिला सचिव फिरोज खान शामिल हैं। इन इस्तीफों के बावजूद, ललन सिंह ने जोर देकर कहा कि इससे पार्टी पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा।
राजद (RJD) पर निशाना साधते हुए ललन सिंह ने कहा कि वक्फ बोर्ड की जटिलताओं को समझना उनके लिए कठिन है और उन्हें लालू यादव के भाषणों पर भी टिप्पणी करनी चाहिए।
इस बीच, जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन और विधायक गोपाल मंडल ने भी इस्तीफा देने वाले नेताओं को कम महत्व का बताया है। राजीव रंजन ने कहा कि इन नेताओं के जाने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वे जनता के बीच अधिक परिचित नहीं हैं।
वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पारित हो चुका है और अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन जाएगा। इस विधेयक के समर्थन में जेडीयू के रुख के कारण पार्टी के भीतर असंतोष उभर कर सामने आया है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है।
