पटना एम्स के एक जूनियर डॉक्टर के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद पूरे बिहार में स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश के कई हिस्सों में एक बार फिर से कोरोना संक्रमण के मामलों में इजाफा देखा जा रहा है। पटना में अब तक तीन लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। संक्रमितों में एक वैज्ञानिक भी शामिल हैं जो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में कार्यरत हैं। इन दोनों मरीजों की कोई विदेश या अंतरराज्यीय यात्रा की जानकारी सामने नहीं आई है। चिकित्सकों का कहना है कि दोनों में कोरोना के गंभीर लक्षण नहीं हैं और वे होम आइसोलेशन में रहकर इलाज करवा रहे हैं।
पटना एम्स में जब डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव पाए गए, तो वहां काम करने वाले अन्य कर्मचारियों और डॉक्टरों की भी जांच शुरू कर दी गई। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और जिला अस्पतालों को सतर्क कर दिया है। खासकर ऑक्सीजन सुविधा वाले बेड और आईसीयू बेड को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। आईजीआईएमएस में फिलहाल 12 बेड और 3 आईसीयू बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि नए मामलों में अब पहले की तरह बुखार, खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण नहीं दिख रहे, बल्कि सिर दर्द, बदन दर्द, थकान और अचानक ऑक्सीजन लेवल गिरने की शिकायतें आ रही हैं।
बिहार में फिलहाल जीनोम सीक्वेंसिंग की सुविधा नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग जल्द ही पॉजिटिव मामलों के सैंपल को बाहर की लैब में भेजकर यह जानने की कोशिश करेगा कि कहीं यह नया वेरिएंट तो नहीं है। विभाग का कहना है कि अभी डरने की जरूरत नहीं है लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की लापरवाही न करें। यदि सर्दी, जुकाम, सिरदर्द या थकान जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और कोविड टेस्ट कराएं। मास्क पहनना, हाथ धोना और भीड़-भाड़ से बचना अभी भी जरूरी है। कोरोना भले ही कमजोर पड़ा हो, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
