बिहार की सामाजिक सुरक्षा पेंशन - हर जरूरतमंद तक पहुंच रही है आर्थिक सहायता

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी मिसाल कायम की है। राज्य में हर 12वां व्यक्ति किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ उठा रहा है। सरकार ने बुजुर्गों, विधवाओं, विकलांगों और अन्य जरूरतमंदों के जीवन को सम्मानजनक बनाने के लिए छह प्रमुख योजनाएं चला रखी हैं। इनमें से तीन योजनाएं पूरी तरह बिहार सरकार के संसाधनों से चल रही हैं, जबकि तीन योजनाएं केंद्र सरकार की भागीदारी से संचालित होती हैं।

हाल ही में, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में महिला संवाद की समीक्षा बैठक में इन पेंशन योजनाओं में मिलने वाली राशि में 175 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। अब सभी योजनाओं में न्यूनतम ₹1100 प्रति माह पेंशन दी जा रही है।

केंद्र सरकार की सहायता से चलने वाली योजनाओं में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय नि:शक्तता पेंशन योजना शामिल है।

इन योजनाओं में केंद्र सरकार  50 से 75 प्रतिशत तक वित्तीय सहयोग करता है, शेष राशि बिहार सरकार देती है। अब पेंशन बढ़ने के बाद, राज्य को 3508.90 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सालाना बोझ उठाना पड़ेगा, जबकि पहले यह बोझ सिर्फ 732.32 करोड़ रुपये था।

बिहार सरकार की अपनी योजना लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, बिहार विकलांगता पेंशन योजना और मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना शामिल है। 

इन तीन योजनाओं का पूरा वित्तीय भार बिहार सरकार स्वयं उठाती है। पहले जहां इन योजनाओं पर सालाना 3308.25 करोड़ रुपये खर्च हो रहे थे, अब यह बढ़कर 4040.58 करोड़ रुपये हो जाएगा।

बिहार सरकार की इन सभी योजनाओं से 1 करोड़ 11 लाख 22 हजार 825 लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। नए वित्तीय प्रावधानों के बाद इन सभी योजनाओं पर बिहार को सालाना 9202.84 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक भार उठाना पड़ेगा।

सभी योजनाओं का मकसद सिर्फ आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। चाहे बुजुर्ग हों, विकलांग या विधवा महिलाएं, हर वर्ग को सामाजिक सुरक्षा का यह कवच जीवन में नई ऊर्जा और आत्मसम्मान का एहसास करा रहा है।

बिहार में सामाजिक सुरक्षा योजनाएं अब महज सरकारी औपचारिकता नहीं रह गई हैं, बल्कि यह जरूरतमंदों की रीढ़ बन गई हैं। पेंशन की राशि में ऐतिहासिक बढ़ोतरी और योजनाओं की पहुंच को देखते हुए कहा जा सकता है कि राज्य सरकार ने सामाजिक न्याय के क्षेत्र में एक ठोस और संवेदनशील पहल की है। यह सिर्फ आंकड़ों की नहीं, भरोसे और संवेदनशील शासन की कहानी है।



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