तंत्र साधना का पावन पर्व - आषाढ़ गुप्त नवरात्र - 26 जून से होगा आरंभ

Jitendra Kumar Sinha
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वर्ष की दूसरी गुप्त नवरात्र का शुभारंभ 26 जून 2025 को हो रहा है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होने वाली यह गुप्त नवरात्र आध्यात्मिक साधना, तंत्र-सिद्धि और रहस्यमयी अनुष्ठानों के लिए विशेष माना जाता  है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह पर्व 4 जुलाई 2025 को विजयादशमी के दिन समाप्त होगा।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 25 जून को शाम 4 बजे से प्रारंभ होकर 26 जून को दोपहर 1.24 बजे तक रहेगा। उदयातिथि का पालन करते हुए 26 जून की सुबह सूर्योदय के बाद से लेकर दोपहर 1.24 बजे तक घट स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त माना जा रहा है। इसी अवधि में श्रद्धालु मंदिरों और घरों में कलश स्थापित कर नौ दिनों की देवी साधना प्रारंभ करेंगे।

गुप्त नवरात्र, चैत्र और शारदीय नवरात्र की तरह सार्वजनिक नहीं होता है, लेकिन साधकों के लिए इसका महत्व अत्यंत विशेष होता है। इस नवरात्र में मां दुर्गा के दस महाविद्याओं काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला, की आराधना किया जाता है। इन देवियों की उपासना विशेष रूप से तंत्र-साधना, आध्यात्मिक जागरण और गुप्त ज्ञान की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

गुप्त नवरात्रि तांत्रिकों और साधकों के लिए अत्यंत उपयुक्त समय होता है। इस अवधि में किया गया साधना जल्द सिद्ध होता है। विशेषकर बगलामुखी और काली साधना शत्रु नाश, रोग मुक्ति और भय निवारण के लिए किया जाता है। आम जन भी इस समय अपने घरों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

इन नौ दिनों में प्रतिदिन मां दुर्गा के एक रूप की आराधना करना चाहिए। घर में घट स्थापना कर अखंड ज्योति जलाना चाहिए। सुबह-शाम दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। तामसिक भोजन से परहेज करते हुए और संयम रखना चाहिए। किसी तांत्रिक अनुष्ठान में भाग लेने से पहले योग्य गुरु का मार्गदर्शन अवश्य लेना चाहिए। 

नौ दिवसीय साधना के बाद 4 जुलाई को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। यह दिन विजय, सफलता और सिद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भक्तजन विशेष पूजा अर्चना कर देवी का विसर्जन करते हैं और विजय का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि आत्मिक और तांत्रिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत प्रभावशाली पर्व है। यह साधकों को शक्ति, सिद्धि और आत्मबल प्रदान करता है। श्रद्धा, भक्ति और संयम के साथ की गई उपासना निश्चित ही मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है।



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