पूर्वी चंपारण के रामायण मंदिर में स्थापित होगा 33 फीट का महाशिवलिंग

Jitendra Kumar Sinha
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भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक नक्शे पर एक और अद्वितीय अध्याय जुड़ने जा रहा है। पूर्वी चंपारण के चकिया में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर न केवल भगवान श्रीराम की भव्यता का प्रतीक होगा, बल्कि इसमें स्थापित होने वाला भोलेनाथ का 33 फीट ऊंचा शिवलिंग भी इस मंदिर की आध्यात्मिक भव्यता में चार चाँद लगाएगा। इस विशाल शिवलिंग की ऊँचाई 33 फीट, गोलाई भी 33 फीट और कुल वजन लगभग 210 मीट्रिक टन होगा। यह न केवल बिहार में बल्कि पूरे उत्तर भारत में मंदिर परिसर में स्थापित होने वाला अब तक का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जा रहा है।

शिवलिंग का निर्माण दक्षिण भारत के प्रसिद्ध शिल्प नगर महाबलीपुरम में किया जा रहा है, जहाँ के शिल्पकारों की विश्व स्तर पर प्रशंसा होती है। आगामी दो महीनों में इस शिवलिंग का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा, इसके बाद इसे विशेष व्यवस्था के तहत पूर्वी चंपारण लाया जाएगा और रामायण मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।

यह मंदिर महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा बनवाया जा रहा है और इसकी कुल लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगा। इस मंदिर की विशेषता इसकी 12 भव्य शिखर हैं, जिनमें से मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगा। इसके अलावा चार शिखरों की ऊंचाई 180 फीट, एक की 135 फीट, आठ की 108 फीट और एक की ऊंचाई 90 फीट होगा।

मंदिर परिसर में कुल 22 उपमंदिर होंगे और प्रवेश द्वार, सिंह द्वार, गणेश स्थल, नंदी की मूर्ति और गर्भगृह की पाइलिंग जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य पूरा हो चुका हैं।

सायण कुणाल, जो बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के सदस्य और प्रसिद्ध धर्माचार्य आचार्य किशोर कुणाल के पुत्र हैं, ने जानकारी दी है कि मंदिर का निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा हैं। उन्होंने बताया है कि 20 जून 2023 को शिलान्यास के साथ ही निर्माण कार्य आरंभ किया गया था, जो तेजी से आगे बढ़ रहा है।

विराट रामायण मंदिर न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश और दुनिया से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करेगा। विशेष रूप से भोलेनाथ का यह 33 फीट का महाशिवलिंग मंदिर को शिवभक्तों के लिए एक तीर्थस्थान बना देगा।

भारत की प्राचीन धार्मिक आस्था को आधुनिक स्थापत्य के साथ जोड़ने वाला यह मंदिर आने वाले वर्षों में न केवल एक आध्यात्मिक स्थल होगा, बल्कि भारतीय संस्कृति और कलाकारी का गौरवशाली प्रतीक भी बनेगा। चंपारण की भूमि पर उभरता यह दिव्य धाम निश्चय ही आने वाली पीढ़ियों के लिए श्रद्धा, भक्ति और गौरव का केंद्र बनेगा।



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