शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि दर्ज करते हुए त्रिपुरा राज्य ने सोमवार को इतिहास रच दिया। अब यह मिजोरम और गोवा के बाद देश का तीसरा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा की उपस्थिति में इस उपलब्धि की औपचारिक घोषणा की गई। 'पूर्ण साक्षरता' का अर्थ है कि राज्य की समूची वयस्क जनसंख्या (15 वर्ष से ऊपर) पढ़ने-लिखने में सक्षम हो। यह केवल स्कूल जाने वाले बच्चों की शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों को शामिल करता है, चाहे वह ग्रामीण हों, शहरी हों, बुजुर्ग हों या महिलाएं।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इस मौके पर कहा कि “मिजोरम और गोवा के बाद अब त्रिपुरा भी भारत का पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। मैं उन सभी शिक्षकों, स्वयंसेवकों, छात्रों और नागरिकों को बधाई देता हूं जिन्होंने इस अभियान में भाग लेकर इसे संभव बनाया।”
इस उपलब्धि के पीछे राज्य सरकार, शिक्षा विभाग, ग्राम पंचायतें, स्वयंसेवी संगठन और अशिक्षा उन्मूलन मिशन की संयुक्त भूमिका रही है। साक्षर भारत मिशन, लोक शिक्षा समितियों और डिजिटल शिक्षा कार्यक्रमों ने भी विशेष योगदान दिया है। रात्रि पाठशालाओं और मोबाइल शिक्षण केंद्रों की स्थापना, बुजुर्गों और गृहिणियों के लिए साक्षरता अभियान, डिजिटल लर्निंग ऐप्स के माध्यम से दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षा की पहुँच और स्वयंसेवकों द्वारा घर-घर जाकर शिक्षण कार्यक्रम के कारण यह सफलता मिली है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक पूरे भारत को पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा है। त्रिपुरा की यह सफलता अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बनेगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, अन्य राज्य भी इसी तरह के मॉडल अपनाकर साक्षरता में सुधार कर सकता हैं।
त्रिपुरा की यह उपलब्धि न केवल शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर है, बल्कि यह दर्शाता है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, समुदाय की भागीदारी और संकल्प से कोई भी लक्ष्य पाया जा सकता है। शिक्षा केवल ज्ञान का साधन नहीं है, बल्कि सामाजिक बदलाव और समृद्धि की कुंजी है। त्रिपुरा ने यह साबित कर दिया है।
