क्लस्टर बम एक अत्यंत खतरनाक और विध्वंसक हथियार है जिसे हाल ही में ईरान द्वारा इज़राइल के खिलाफ इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। ये बम एक बड़े गोले के रूप में दागे जाते हैं, जो हवा में फटकर कई छोटे बमों — जिन्हें सबम्यूनिशन या ‘बॉमलेट्स’ कहा जाता है — में बंट जाते हैं। ये छोटे बम बड़े इलाके में फैलते हैं और एक ही हमले में एक फुटबॉल मैदान जितने क्षेत्र को तबाह कर सकते हैं। बताया गया है कि ईरान ने जिस मिसाइल का इस्तेमाल किया, वह लगभग सात किलोमीटर की ऊँचाई पर फटा और इसके करीब 20 सबम्यूनिशन लगभग आठ किलोमीटर के दायरे में गिरे।
क्लस्टर बमों की सबसे बड़ी खतरनाक विशेषता यह है कि इनका असर सिर्फ युद्ध के समय तक सीमित नहीं होता, बल्कि ये बम कई दशकों तक जमीन में दबे रह सकते हैं और बाद में किसी भी नागरिक के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। ये अक्सर खेतों में, बच्चों के खेलने की जगहों पर या फिर सामान्य आवासीय इलाकों में गिरते हैं और अगर तुरंत फटें नहीं, तो भविष्य में इन्हें अनजाने में छूने या हिलाने से विस्फोट हो सकता है। बच्चों के लिए ये छोटे बॉमलेट्स खिलौनों की तरह लग सकते हैं और यही बात इन्हें और भी ज्यादा घातक बनाती है।
वर्ष 2008 में एक अंतरराष्ट्रीय संधि ‘क्लस्टर म्यूनिशन कन्वेंशन’ के तहत ऐसे बमों के निर्माण, भंडारण और प्रयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि, इज़राइल, ईरान, अमेरिका, रूस और चीन जैसे कई देश इस संधि का हिस्सा नहीं हैं और इसी कारण इनका इस्तेमाल अब भी जारी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में चिंता गहराती जा रही है।
19 जून 2025 को इज़राइल के केंद्रीय हिस्से पर ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमले में एक क्लस्टर बम के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। इज़राइली डिफेंस फोर्स (IDF) ने बताया कि इस हमले में एक आवासीय भवन को नुकसान पहुंचा, हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स में जानमाल की कोई बड़ी क्षति नहीं बताई गई है। इज़राइली प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध वस्तु को न छुएं और तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
यह पूरा मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसलिए चिंता का विषय बना है क्योंकि क्लस्टर बम युद्ध समाप्त होने के बाद भी जानलेवा बने रहते हैं। युद्ध के बाद जितनी मौतें और विकलांगताएं इनसे होती हैं, वह कहीं अधिक होती हैं। इसके अलावा, ऐसे बमों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कानूनों की भी अनदेखी करता है, खासकर जब उन देशों द्वारा किया जाए जो खुद इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं करते।
क्लस्टर बम केवल एक हथियार नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक आतंक है, जो न केवल युद्ध के दौरान बल्कि वर्षों बाद भी मासूम लोगों की जान ले सकता है। इन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित किया गया है, फिर भी कुछ देश इन्हें आज भी सैन्य रणनीति के रूप में उपयोग कर रहे हैं। ईरान पर लगाया गया यह आरोप इस बात की एक और चेतावनी है कि इन हथियारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को और ज्यादा सख्ती और जागरूकता की जरूरत है।
