अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु ठिकानों को लेकर चल रहे तनाव के बीच अब एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ हालिया हमले में पाकिस्तान के एयरस्पेस का इस्तेमाल किया। यही नहीं, इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनिर को अमेरिका का मोहरा बताया जा रहा है। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जनरल मुनिर के बीच व्हाइट हाउस में हुई गुप्त मुलाकात ने इस पूरे मामले को और भी विवादास्पद बना दिया है।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान ईरान को बेहतर तरीके से जानता है और इसीलिए उन्होंने मुनिर से इस विषय पर विशेष चर्चा की। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया गया है कि अमेरिका ने अपने स्टील्थ B-2 बॉम्बर्स के ज़रिए ईरान के फोर्डो जैसे संवेदनशील परमाणु ठिकानों पर बमबारी की और इसके लिए पाकिस्तान के हवाई मार्ग का उपयोग किया गया। वीडियो में यह भी कहा गया कि यह हमला ईरान की परमाणु क्षमताओं को पंगु बनाने के उद्देश्य से किया गया था।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान और अमेरिका के बीच यह समझौता ट्रंप और मुनिर के बीच बैठक के दौरान हुआ, जहां पाकिस्तान को अमेरिका की तरफ से सैन्य और आर्थिक मदद के आश्वासन भी दिए गए। इस बैठक में चीन और इजरायल के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अमेरिका चाहता था कि पाकिस्तान उसकी रणनीतिक योजना में शामिल हो और उसने इसके लिए पाकिस्तान को एयरबेस तक देने का प्रस्ताव रखा।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे विवादास्पद बात यह है कि ट्रंप प्रशासन ने इस बैठक को सार्वजनिक नहीं किया। यह मुलाकात न तो अमेरिकी प्रेस को बताई गई और न ही पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई। विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह दावे सच हैं, तो यह पाकिस्तान के लिए पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। ईरान-पाकिस्तान संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं और इस तरह के सहयोग से ईरान की प्रतिक्रिया तीखी हो सकती है।
इस बीच, पाकिस्तानी मीडिया और सरकार इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे अटकलों को और बल मिल रहा है। वहीं, ईरान ने भी अब तक इस कथित हमले को लेकर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह तय है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तापमान और बढ़ेगा।
ट्रंप के फिर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनने की घोषणा के बाद यह घटना एक बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखी जा रही है। यह दिखाता है कि अगर ट्रंप सत्ता में लौटते हैं, तो उनकी विदेश नीति एक बार फिर आक्रामक और विवादास्पद होगी। जनरल मुनिर के साथ ट्रंप की बैठक को कई लोग पाकिस्तान की विदेश नीति में अमेरिका के प्रभाव की वापसी के रूप में भी देख रहे हैं।
फिलहाल इस खबर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम एशिया में हालात बेहद नाजुक हैं और किसी भी गलत कदम से एक बड़ा सैन्य संघर्ष जन्म ले सकता है। अमेरिका की यह रणनीति उसे ईरान पर दबाव बनाने में जरूर मदद कर सकती है, लेकिन इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।
