उत्तर प्रदेश की राजनीति अब तकनीक के नए युग में कदम रखने जा रहा है। देश की सबसे बड़ी विधानसभा अब जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी सिस्टम से लैस होने वाली है। यह न सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। यूपी विधानसभा देश की पहली ऐसी संस्था होगी, जहां हाईटेक एआई निगरानी प्रणाली लागू किया जाएगा।
इस अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली में एआई संचालित कैमरा लगाया जाएगा, जो विधानसभा भवन के प्रत्येक कोने पर नजर रखेगा। यह कैमरा न सिर्फ सामान्य गतिविधियों को रिकॉर्ड करेगा, बल्कि संदिग्ध चाल-ढाल, चेहरे की पहचान (Face Recognition) और असामान्य व्यवहार को भी ट्रैक कर सकेगा। अगर कोई व्यक्ति सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक लगेगा, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा।
इस सिस्टम के तहत विधानसभा परिसर की हर गतिविधि का 24x7 रिकॉर्डिंग होगा। विधायकों, आगंतुकों और कर्मचारियों की चेहरे की पहचान (Facial Recognition) करेगा, संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की तुरंत पहचान करेगा और सतर्कता बतायेगा, रिकॉर्डिंग का उपयोग सुरक्षा, अनुशासन और प्रशासनिक समीक्षा के लिए किया जा सकेगा।
विधानसभा में अक्सर देखा गया है कि हंगामा, अनुशासनहीनता या असंवेदनशील व्यवहार पर बहस तो होती है, लेकिन ठोस सबूतों की कमी के कारण कार्रवाई अधूरी रह जाती है। अब एआई सिस्टम इन सभी घटनाओं को कैद करेगा, जिससे सटीक प्रमाणों के साथ कार्रवाई किया जा सके। इससे विधायकों की जवाबदेही भी बढ़ेगी और विधानसभा की कार्यवाही ज्यादा अनुशासित हो सकेगा।
देशभर की विधानसभाओं और संसद भवन में सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा रहा है। ऐसे में यूपी विधानसभा का यह कदम मिसाल बन सकता है। यह सिस्टम बाहरी घुसपैठ, आपराधिक तत्वों की पहचान और किसी भी आपात स्थिति में रियल टाइम रिस्पॉन्स की क्षमता देगा।
सिस्टम की स्थापना के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुका है। टेंडर फाइनल होने के बाद 45 दिनों के भीतर कैमरे और अन्य डिवाइस इंस्टॉल कर दिया जाएगा। यह काम एक चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि विधानसभा का कामकाज प्रभावित न हो।
यह पहल न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देश की अन्य विधानसभाओं और संसद के लिए भी रोल मॉडल बन सकता है। जब राजनीति में पारदर्शिता और तकनीक का संगम होगा, तो लोकतंत्र और मजबूत होगा।
यूपी विधानसभा की यह पहल भारतीय लोकतंत्र में तकनीक की क्रांति का संकेत है। जहां पहले सिर्फ बहस होता था, अब वहां डेटा और रिकॉर्डिंग के आधार पर जवाबदेही तय होगा। एआई तकनीक लोकतंत्र को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और अनुशासित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
