बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सोमवार को एक बड़ा हादसा हुआ जब बांग्लादेश एयरफोर्स का एक एफ-7 बीजीआई फाइटर जेट प्रशिक्षण के दौरान क्रैश हो गया। यह विमान टेकऑफ के कुछ ही मिनटों बाद उत्तारा इलाके के मिलस्टोन स्कूल एंड कॉलेज की इमारत से टकरा गया, जिससे बड़ा विस्फोट हुआ और स्कूल में आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक कम से कम 31 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकतर स्कूली छात्र शामिल हैं। पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट मोहम्मद तौकिर इस्लाम की भी मौत हो गई, जो अपनी पहली एकल उड़ान पर थे। लगभग 170 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बनी हुई है।
घटना के तुरंत बाद फायर ब्रिगेड, पुलिस और आपातकालीन सेवाएं घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू हुआ। स्थानीय लोग भी घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद करते देखे गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान में तकनीकी खराबी के चलते वह तेजी से नीचे गिरा और स्कूल की छत को तोड़ता हुआ अंदर घुस गया।
बांग्लादेश सरकार ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है और एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी गई है। वहीं देश में एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा भी की गई है। इस घटना ने देशभर में आक्रोश और चिंता पैदा कर दी है, खासकर इस बात को लेकर कि क्यों इतने पुराने और तकनीकी रूप से संदिग्ध विमान अभी भी प्रशिक्षण के लिए उपयोग किए जा रहे हैं।
भारत ने इस मुश्किल समय में मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाया है। भारत सरकार ने विशेष बर्न केयर विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सों और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की एक टीम ढाका भेजी है। इन विशेषज्ञों की टीम वहां घायलों की मदद करेगी और जरूरत पड़ने पर गंभीर रूप से जले हुए मरीजों को भारत लाकर इलाज कराया जाएगा। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत, पड़ोसी और मित्र देश के रूप में हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
एफ-7 बीजीआई लड़ाकू विमान चीन द्वारा निर्मित एक सुपरसोनिक ट्रेनिंग और लाइट फाइटर जेट है, जिसे मूल रूप से सोवियत संघ के मिग-21 के आधार पर विकसित किया गया था। बांग्लादेश ने 2011 से 2013 के बीच ऐसे 16 विमान खरीदे थे, लेकिन इनकी तकनीकी विश्वसनीयता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
इस हादसे ने देशभर में विमानों की सुरक्षा, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहन चर्चा शुरू कर दी है। छात्र संगठनों और अभिभावकों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं, जिसमें वे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा देने की मांग कर रहे हैं।
यह हादसा सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की लापरवाही और तकनीकी अनदेखी का प्रतीक बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखने की बात होगी कि जांच रिपोर्ट क्या निष्कर्ष निकालती है और बांग्लादेश सरकार अपनी सैन्य और प्रशिक्षण संरचना में क्या बदलाव करती है। फिलहाल, पूरा देश शोक में डूबा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पीड़ितों के साथ एकजुटता जता रहा है।
