पटना जिला में आपातकालीन सेवा डायल 112 की गाड़ियां इन दिनों ठप पड़ी हैं। कारण है चालकों की हड़ताल। बहाली के समय दिए गए वादों और सुविधाओं को लागू न किए जाने से नाराज होकर चालक संघ ने दो दिनों की हड़ताल का ऐलान किया। इस हड़ताल से जिला की 124 गाड़ियां बंद हो गई हैं और करीब 400 से अधिक चालक काम से अलग हो गए हैं।
चालक संगठन के अध्यक्ष चंदन कुमार और उपाध्यक्ष धीरज कुमार यादव का कहना है कि उन्हें 25,000 रुपये मासिक वेतन पर बहाल किया गया था, लेकिन अब तक केवल 750 रुपये की वृद्धि हुई है। इसके अलावा छुट्टी की सुविधा, रिलीवर, बीमा और अन्य वेलफेयर लाभ अब तक लागू नहीं किए गए।
चालकों ने आरोप लगाया है कि महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। उनसे 12-12 घंटे ड्यूटी ली जा रही है। यहां तक कि छोटे बच्चों वाली महिला चालक को गोद में बच्चा लेकर ड्यूटी करनी पड़ रही है। यह स्थिति न सिर्फ संवेदनहीनता को दर्शाता है बल्कि श्रम कानूनों और मानवाधिकारों के उल्लंघन का भी मिसाल है।
डायल 112 को प्रभावी बनाने के लिए 21 जनवरी 2022 को भूतपूर्व सैनिकों की अनुबंध पर बहाली हुई थी। तब आश्वासन दिया गया था कि ड्यूटी घर से 10-15 किलोमीटर के दायरे में होगी, साल में 20 दिन छुट्टी और साप्ताहिक अवकाश मिलेगा। साथ ही चालकों का बीमा भी कराया जाएगा। लेकिन तीन साल बाद भी यह वादे कागजों तक ही सीमित हैं। अब तक 15 जवानों की मृत्यु हो चुकी है, बावजूद इसके परिवारों को कोई सहयोग नहीं मिला।
हड़ताल के कारण जिले में पेट्रोलिंग प्रभावित हो रही है। डायल 112 का मकसद ही था, तुरंत सहायता और सुरक्षा मुहैया कराना। लेकिन गाड़ियां बंद रहने से अपराध नियंत्रण और आपात स्थितियों में परेशानी बढ़ गई है।
चालकों का मांग है कि पहचान पत्र और नियुक्ति पत्र जारी किया जाए। स्थानांतरण भत्ता दिया जाए।
बीमा और वेलफेयर योजनाएं लागू की जाए। छुट्टी और अवकाश की सुविधा दी जाए। वेतन वृद्धि और समय पर भुगतान सुनिश्चित हो।
डायल 112 जैसी सेवा जनता की सुरक्षा के लिए शुरू की गई थी। अगर चालक ही असंतुष्ट और उपेक्षित रहेंगे तो इस सेवा का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि उनकी जायज मांगों पर तुरंत विचार करे, ताकि सुरक्षा व्यवस्था बहाल हो और चालकों का विश्वास भी लौटे।
