हिन्दी दिवस पर ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त का हिन्दी में संदेश

Jitendra Kumar Sinha
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भारत में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फिलीप ग्रीन ने रविवार को हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी प्रेम और सम्मान का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने न केवल हिन्दी में शुभकामनाएँ दीं बल्कि एक वीडियो संदेश भी साझा किया, जिसमें कई ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हिन्दी के लोकप्रिय टंग ट्विस्टर “कच्चा पापड़, पक्का पापड़” को बोलने की कोशिश करते दिखाई दिए। यह नजारा न केवल रोचक था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि हिन्दी की पहचान सीमाओं से परे जाकर एक वैश्विक भाषा के रूप में बढ़ रही है।

हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है। 1949 में इसी दिन संविधान सभा ने हिन्दी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया था। तब से यह दिन भाषा के गौरव और उसकी समृद्ध परंपरा को याद करने का अवसर बन गया है। हिन्दी दिवस न केवल भारतवासियों को अपनी मातृभाषा से जुड़ाव महसूस कराता है, बल्कि यह दुनिया के अन्य देशों को भी भारतीय संस्कृति और विचारधारा की ओर आकर्षित करता है।

फिलीप ग्रीन ने अपने संदेश में कहा है कि हिन्दी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह संस्कृति और विचारों का सेतु है। यह लोगों को जोड़ती है, संवाद को सरल बनाती है और विविधता में एकता की भावना को बल देती है। उनका यह कथन भारत की भाषाई विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने वाला है।

वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हिन्दी बोलने की कोशिश कर रहे थे। “कच्चा पापड़, पक्का पापड़” जैसे टंग ट्विस्टर को उच्चारित करना भले ही उनके लिए कठिन था, लेकिन उनकी कोशिश यह बताती है कि भाषा सीखना केवल संचार का साधन नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक जुड़ाव का माध्यम भी है।

आज हिन्दी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। विश्व के अनेक देशों में हिन्दी बोलने वाले समुदाय मौजूद हैं। मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद, सूरीनाम और नेपाल जैसे देशों में तो हिन्दी का गहरा प्रभाव है। अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी हिन्दी सीखने और बोलने वालों की संख्या बढ़ रही है। यह इस बात का प्रमाण है कि हिन्दी अब वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना रही है।



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