जम्मू-कश्मीर की धरती को प्रकृति ने अपार सुंदरता से नवाजा है। यहां की वादियां, पहाड़, नदियां और झीलें पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही हैं। इन्हीं झीलों में एक है “वूलर झील”, जिसे एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील माना जाता है। यह झील न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका और पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा भी है।
“वूलर झील” जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में स्थित है। समुद्र तल से लगभग 1,580 मीटर की ऊँचाई पर फैली यह झील करीब 24 किलोमीटर लंबी और 10 किलोमीटर चौड़ी है। इसका विस्तार मौसम के अनुसार, बदलता रहता है। बरसात के दिनों में इसका आकार और भी बढ़ जाता है, जबकि गर्मियों में इसका क्षेत्रफल कुछ कम हो जाता है। इस झील का प्रमुख स्रोत झेलम नदी है, जो इसमें बहकर आती है और आगे भी प्रवाहित होती है।
“वूलर झील” चारों ओर से ऊँचे-ऊँचे पर्वतों से घिरी हुई है। इसके नीले पानी में पहाड़ों और आसमान का प्रतिबिंब एक अद्भुत नजारा पेश करता है। झील के किनारे कई छोटे-छोटे गांव बसे हुए हैं, जो इसे और भी आकर्षक बनाते हैं। यह झील पक्षियों, मछलियों और अन्य जलीय जीवों का घर है। सर्दियों में यहां साइबेरियन पक्षी भी आते हैं, जिससे यह स्थान पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग बन जाता है।
“वूलर झील” स्थानीय लोगों के जीवन का आधार है। यहां बड़ी मात्रा में मछली पकड़ने का काम होता है, जो हजारों परिवारों की आजीविका का साधन है। झील से निकली हुई जलीय घास और सरकंडे का उपयोग स्थानीय कारीगर चटाई, टोकरियां और अन्य वस्तुएं बनाने में करते हैं। इसके अलावा यह झील आसपास के खेतों की सिंचाई के लिए भी पानी उपलब्ध कराती है।
“वूलर झील” बाढ़ नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभाती है। झेलम नदी में जब पानी का स्तर बढ़ता है, तो यह झील अतिरिक्त पानी को समेट लेती है और श्रीनगर समेत अन्य निचले इलाकों को बाढ़ से बचाती है। इसके अलावा यह झील क्षेत्र के भूजल स्तर को संतुलित रखने में भी सहायक है।
कश्मीर आने वाले पर्यटक “वूलर झील” की सैर करना नहीं भूलते। नौकायन, बोटिंग और प्राकृतिक दृश्य का आनंद लेने के लिए यह झील एक आदर्श स्थान है। इसके शांत वातावरण में पर्यटक खुद को प्रकृति की गोद में पाते हैं।
“वूलर झील” केवल एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील ही नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर की शान भी है। यह झील प्राकृतिक संपदा, आर्थिक संसाधन और पर्यावरण संरक्षण तीनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इसका संरक्षण सही ढंग से किया जाए, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रकृति का अनमोल तोहफा बनी रहेगी।
