बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले पटना हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने बयान दिया है कि अगर राजनीतिक दलों ने वकीलों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया तो वकील अपनी पार्टी बनाकर राज्य की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। उनका कहना है कि करीब 50 लाख लोग वकालत पेशे से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हैं, लेकिन चुनावी टिकट वितरण में उन्हें लगातार नज़रअंदाज़ किया जाता है। वर्मा ने मांग रखी कि कम से कम 25 प्रतिशत टिकट वकीलों को दिए जाने चाहिए क्योंकि वे जनता की आवाज़ और समस्याओं को न्यायिक और संवैधानिक दृष्टिकोण से बेहतर ढंग से उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक टिकट बांटने की प्रक्रिया में धनबल और अपराधी पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को तरजीह दी जाती रही है, जबकि कानून और न्याय को समझने वाले पेशेवरों को दरकिनार कर दिया गया है।
वकीलों का मानना है कि अगर उन्हें पर्याप्त अवसर मिले तो वे राजनीति में न केवल ईमानदारी और पारदर्शिता ला सकते हैं बल्कि कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों की भी रक्षा कर सकते हैं। यह चेतावनी राजनीतिक दलों के लिए दबाव बनाने की कोशिश है, लेकिन साथ ही चुनौती भी है क्योंकि टिकट वितरण जाति, क्षेत्र और वोट बैंक के समीकरणों से बंधा होता है। यदि वकीलों को 25 प्रतिशत टिकट देने की मांग पूरी नहीं होती तो स्वतंत्र पार्टी बनाने की स्थिति में उन्हें संगठन खड़ा करना, उम्मीदवार चुनना, प्रचार और फंडिंग जैसी कठिन चुनौतियों से गुजरना होगा। अब देखना होगा कि जनता और राजनीतिक दल इस पहल पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह कदम वाकई बिहार की राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर पाएगा।
